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चूल्हे में लगी ‘महंगाई की आग’, सिलिंडर हजार रुपये के पार

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। बढ़ती महंगाई से जनता त्रस्त है। खाद्यान्न और सब्जियों के दाम तो पहले से ही आसमान छू रहे हैं, अब घरेलू गैस के लगातार बढ़ते दाम ने किचन के खर्च का बोझ बढ़ा दिया है। घरेलू गैस सिलिंडर का दाम एक हजार रुपये से ऊपर हो चुका है। गृहिणियों का कहना है कि खाद्यान्न, खाद्य तेल और पेट्रोल व डीजल के दाम पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। आमदनी इतनी नहीं है कि इतनी महंगाई का सामना किया जा सके, जिससे वह परेशान हैं।
रसोई गैस के दाम पहले ही अधिक थे। अब फिर गैस सिलिंडर के दाम में 50 रुपये वृद्धि कर दी है। 2014 से पूर्व सिलिंडर का दाम 350 से 370 रुपये तक था। अब यह तीन गुना ज्यादा हो गया है। ऐसे में भूखा रहने की नौबत आने वाली है।
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- संतोष तेजान, प्रदेश चेयरमैन, भारतीय मानव अधिकार मोर्चा
लोगों की आमदनी नहीं बढ़ी जबकि महंगाई के कारण खर्च का बोझ निरंतर बढ़ता जा रहा है। कोरोना काल में ही सभी वर्गों पर महंगाई की मार पड़ी। गृहणियां चिंतित हैं। महंगाई से राहत नहीं दी जा रही। गरीब आदमी मजदूरी करके गेहूं तो खरीद सकता है लेकिन रोटियां कैसे पकाएगा।
- अनुज सिंगला, कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष, महिला इकाई
पेट्रोलियम पदार्थों के दाम में बेतहाशा वृद्धि ने जनता की कमर तोड़ दी है। इसका असर हर वस्तु पर पड़ता है। रसोई का बजट बिगड़ चुका है। इतनी बड़ी आबादी के पास भोजन पकाने का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए जनता मजबूर है। सरकार राहत देने का काम करे।
-गीता शर्मा, गृहिणी
मध्यम वर्गीय लोग दो वक्त की रोटी के इंतजाम में ही उलझ गए हैं। परिवार के उत्थान की बात बहुत दूर हो चुकी है। इतनी महंगाई में भला कोई कैसे बच्चों को पढ़ाए और गुजारा करे। सभी वर्ग महंगाई के जाल में उलझकर रह गए। अब चूल्हा जलाना मुश्किल है।
--- जरासो देवी, जिला प्रधान, जनवादी महिला समिति
कोरोना काल में बिगड़ी घर की आर्थिक स्थिति अभी पटरी पर नहीं आई। ज्यादातर लोग कर्जदार हैं। रसोई का बजट बढ़ता जा रहा है। रोटी पकाने की चिंता पैदा हो गई है। सरकार से अपील है कि रसोई गैस के दाम नियंत्रित करे। जनता को बढ़ती महंगाई से राहत देने का काम करे।
- दीक्षा शर्मा, गृहिणी
सामान्य नागरिक के लिए घर चलाना चुनौतिपूर्ण बन गया है। मार्केट में 50 रुपये किलो से कम किसी सब्जी का भाव नहीं है। हर नागरिक अपने घर का बजट बनाता है। खर्च में कटौती भी कहां तक करें। महंगाई की सीमा ही नहीं रही। दैनिक जरूरत का हर सामान महंगा है।
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- मंजू, गृहिणी
महंगाई ने तोड़ा रिकॉर्ड
करनाल। वर्ष 2014 से पूर्व पेट्रोल का दाम 65 से 68 रुपये प्रति लीटर था जो अब 100 रुपये से अधिक है। डीजल का भाव 55 से 58 रुपये लीटर था जो अब 96 रुपये के करीब है। रसोई गैस सिलिंडर 350 से 370 रुपये था, जो अब एक हजार रुपये से पार हो गया। खाद्य तेल के दाम तीन गुना बढ़े हैं। दोपहिया वाहनों के दाम दो से तीन गुना बढ़ गए। आठ वर्ष में सोना, सीमेंट व लोहे के भाव दोगुने हो गए। रेत, बजरी व ईंट के भाव दोगुने हुए हैं। ऐसी स्थिति में कैसे नागरिक गुजारा करेगा।
- तिरलोचन सिंह, जिला संयोजक, कांग्रेस
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