फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्ज निभाते संक्रमण ने घेरा, जीते और फिर सेवा में जुट गए

विज्ञापन
विज्ञापन
कर्णनगरी में कोरोना की दस्तक और लॉकडाउन के बाद हरकत में आई प्रदेश सरकार ने महामारी पर काबू पाने के लिए विशेष टीम का गठन किया था। इसके तहत उन्नीस डाक्टरों की टीम ने कर्णनगरी के टूरिस्ट प्लेस कर्णलेक को अपना ठिकाना बनाया था। इसमें पानीपत और यमुनानगर सहित अन्य जिलों के भी डाक्टर शामिल थे। सरकार की ओर से कर्णलेक पर ही सभी डाक्टरों के रहने की व्यवस्था की गई थी, जहां छह माह तक रहकर कोरोना योद्धाओं ने महामारी के खिलाफ जंग लड़ी। इस दौरान कोरोना मरीजों की सेवा करते-करते कई डाक्टर संक्रमित भी हो गए थे, लेकिन उन्होंने लड़ाई जारी रखी। घर परिवार से अलग रहकर महामारी के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले इन कोरोना योद्धाओं से अमर उजाला ने विशेष बातचीत की और मुश्किलों और नई चुनौतियों पर चर्चा की। आप भी जानिए उन्हीं की जुबानी महामारी की कहानी ----
विज्ञापन

----------
कोरोना की लड़ाई का नेतृत्व कर रहे टीम लीडर डाक्टर लोकेंद्र सिंह फिलहाल कल्पना चावला मेडिकल कालेज में इमरजेंसी आईसीयू के प्रभारी हैं। उनका कहना है कि कोरोना की जंग में आमजन की जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है, जिसके बिना महामारी को मात देना संभव नहीं है। जागरूकता से ही हम स्वयं और परिवार के साथ ही दूसरों की भी रक्षा कर सकेंगे। जागरूकता से ही हम महामारी के संक्रमण को रोक सकते हैं। इसके अलावा कोरोना मरीजों के लिए आत्मविश्वास और परिवार की सकारात्मक भूमिका अहम है।
----
कोरोना वारियर्स में शामिल रहे डाक्टर अंकुश फिलहाल कल्पना चावला मेडिकल कालेज में टीबी चेस्ट और कोरोना आइसोलेशन वार्ड में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि कोरोना काल में वे आईसीयू में भी कार्यरत रहे हैं। इस दौरान महामारी ने काफी कुछ सिखाया है और अभी महामारी नए रूप में सामने आ रही है, इसलिए हमें जागरूक रहना है। कोई भी बीमारी दिमाग से शुरू होती है और फिर शरीर उसे फालो करता है। इसलिए हमें मानसिक रूप से मजबूत रहना होगा।
विज्ञापन

---------
कोरोना काल में कोविड टीम का हिस्सा रही पानीपत निवासी डाक्टर बानी का कहना है कि अगस्त से जनवरी तक उन्होंने घर परिवार से अलग करनाल के कर्णलेक पर रहकर मेडिकल कालेज में ड्यूटी की है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से डाक्टरों के लिए कर्णलेक पर रहने की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान काफी कुछ सीखने को मिला। अभी कोरोना की जंग खत्म नहीं हुई है। ऐसे में जहां आमजन को जागरूक रहने की जरूरत है, वहीं सरकार की ओर से भी ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है, तभी महामारी को मात दी जा सकती है।
----
कोविड के खिलाफ जंग में टीम का हिस्सा रहे यमुनानगर निवासी डाक्टर अंकुश का कहना है कि कल्पना चावला मेडिकल कालेज में उन्होंने अगस्त से जनवरी तक करीब छह माह कोविड ड्यूटी की है। इस दौरान टीम के साथ ही उनका ठिकाना कर्णलेक ही रहा है। उनके अनुसार ड्यूटी के दौरान ही कई डाक्टर साथी कोरोना पाजिटिव हो गए थे, जिसके कारण उन्हें भी इक्कीस दिन क्वारंटीन रहना पड़ा था। दो बार कोविड टेस्ट भी कराना पड़ा, लेकिन दोनों बार रिपोर्ट निगेटिव रही थी। इस दौरान घर परिवार से अलग रहकर ड्यूटी काफी चुनौतीपूर्ण रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें