प्रदेश में पंचायतों, ब्लाक समितियों व जिला परिषद के चुनाव की तिथियों की घोषणा होते ही गांवों में चुनावी सरगर्मियां शुरू हो चुकी हैं। सभी पार्टियां अपने अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान मे उतारने के लिए विचार कर रही है। सभी पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने अपनी अपनी पार्टी के नेताओं से संपर्क भी करना शुरू कर दिया है, ताकि उनका नेता उनके समर्थन में आ जाए। हालांकि, खुलकर कोई पार्टी मैदान में नहीं आ रही है।
निसिंग ब्लॉंक के औगंध गांव में भी चुनावी बिगुल बज चुका है। इस गांव को देश की पहली महिला सरपंच बनाने का गौरव प्राप्त है। औंगध गांव की धनपति ने वर्ष 1977 में देश की पहली महिला सरपंच बनकर इतिहास रचा था। उससे पहले पुरुष ही सरपंची की कुर्सी संभालते आए हैं। धनपति के सरपंच बनने के बाद ही देश मे महिला सरपंच व पंचों के पद आरक्षित होने लगे हैं।
औगंध गांव में इस बार सरपंच पद का चुनाव ओपन महिला वर्ग के लिए होगा। गांव में 20 वार्ड बनाए गए हैं, जिनमें पंच चुने जाएंगे। गांव में सरपंच पद के लिए आधा दर्जन महिला उम्मीदवार मैदान में है। गांव के करीब 5,500 मतदाता भावी सरपंचों के भाग्य का फैसला करेंगे।
युवा ग्रामीण वर्ग का कहना है कि गांव में सरपंच व पंच पढ़ा लिखा होना जरूरी है, यदि पंच सरपंच पढे़ लिखे होंगे तो गांव के विकास कार्यों में घपले व घोटाले कम होंगे और वे प्रत्येेक कार्य को सोच समझ कर करेंगे। यदि प्रदेश व देश की तरक्की करनी है तो हर व्यक्ति का पढ़ा लिखा होना जरूरी है, क्योकि हर पंच व सरपंच अपने अधिकार के प्रति जागरूक होगा और भविष्य में अनपढ़ता समाप्त होगी।
गांव वासी बलविंद्र, सूबे सिंह राणा, सुरेन्द्र कुमार, प्रेम सिंह, रामजवारी, प्रिंस, सागर व कर्मबीर आदि का कहना है कि गांव में विकास कार्य तो हुए, लेकिन कुछ समस्याएं अभी भी ज्यों की त्यों बनी हुई है। अब की बार चुनाव में गंदगी, पानी की निकासी की समस्या व लड़कियों के स्कूल को अपग्रेड करवाने आदि मुद्दे हावी रहेंगे।
क्या कहते हैं सरपंच
सरपंच दिलबाग राणा का कहना है कि उन्होंने अपने पांच साल के कार्यकाल मे गांव में करोड़ों रुपये के विकास कार्य करवाए हैं जो एक मिसाल है। गांव में दर्जनों पीने के पानी के नल लगवाए, सभी गलियों व नालियों को पक्का करवाया। एससी. वर्ग व बीसी वर्ग की चौपालें बनवाई और गांव में सभी बिरादरी के लोगों के साथ भाईचारा कायम रखा।
कोट
कुलभूषण बंसल, बीडीपीओ