संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। महिलाओं का नौकरी करना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना आज समय की जरूरत बन चुका है, लेकिन यही बदलाव कई पारिवारिक रिश्तों में टकराव की वजह भी बनता जा रहा है। महिला थाने में हर माह ऐसे तीन से चार मामले पहुंच रहे हैं, जिनमें नौकरी न करवाने को लेकर पति-पत्नी में विवाद हो रहे हैं।
महिला थाना एसएचओ कन्नू प्रिया ने बताया कि काउंसलिंग और आपसी समझौते के बाद भी कई मामलों में स्थिति दोबारा बिगड़ जाती है। पति नौकरी न करने का दबाव बनाता है, तो कहीं बेरोजगारी और कम आय के कारण पुरुषों में रोष बढ़ रहा है। इसका असर सीधा घरेलू रिश्तों पर पड़ रहा है। अधिकतर मामलों में पत्नी नौकरी करना चाहती है या पहले से नौकरी कर रही होती है, लेकिन पति या ससुराल पक्ष को यह स्वीकार नहीं होता। पति-पत्नी के समझौते के कुछ महीने बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। महिला संरक्षण अधिकारी सविता राणा ने बताया कि पहले के मुकाबले अब महिलाएं जागरूक हो चुकी हैं, जिनमें वह अपने अधिकारों को लेकर सचेत रहती हैं।
- समझौते के बाद फिर बनाया दबाव
शहर की 32 वर्षीय महिला ने महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई कि शादी के बाद पति ने उसे नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया। विरोध करने पर मारपीट की। पहली शिकायत के बाद दोनों के बीच समझौता कराया गया। समझौते में नौकरी करने की स्वतंत्रता, घरेलू हिंसा न करना और ससुराल पक्ष का हस्तक्षेप न होना जैसे वादे किए गए, लेकिन कुछ ही महीने बाद पति ने फिर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया। महिला ने दोबारा शिकायत दर्ज करवाई।
- नौकरी करने पर होने लगा कलह
एक मामले में महिला निजी कंपनी में प्रबंधक के रूप में कार्यरत थी। महिला ने बताया कि उसकी सास नहीं चाहती थी कि वह नौकरी करे, जिसके बाद कलह होने लगे। ससुराल पक्ष के साथ काउंसलिंग होने पर समझौता किया गया कि नौकरी के लिए तैयार हैं, लेकिन पति ने फिर हिंसा की। महिला ने परेशान होकर शिकायत दी। ससुराल पक्ष के साथ फिर से बातचीत कर रिश्ते को बचाने पर सहमति हुई, जिसमें पत्नी ने अपने बच्चों के लिए नौकरी करने की इच्छा रखी।