- सिर्फ पांच वर्ष तक के बच्चों को चश्मा लगाने की पड़ रही जरूरत
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। मोबाइल, टीवी पर अधिक समय बिताने के कारण अधिकतर बच्चों में दृष्टि दोष बढ़ रहा है। जिस कारण बचपन में ही बच्चों को देखने के लिए चश्मा का सहारा लेना पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण बच्चे खेल-कूद के स्थान पर अपना अधिकतर समय मोबाइल या टीवी पर बिता रहे हैं। जहां पहले बुजुर्ग होने पर या फिर किसी चोट के कारण आंखों में चश्मा लगाने की जरूरत पड़ती थी वहीं आज सिर्फ पांच वर्ष तक के बच्चों को चश्मा लगाने की जरूरत पड़ रही है। जो गंभीर और चिंता का विषय है।
क्या है दृष्टि दोष
नागरिक अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतिका ने बताया कि दृष्टि दोष वह स्थिति है जिसमें आंख की लंबाई अधिक या कम होने पर किसी भी आकृति का प्रतिबिंब रेटिना यानी पर्दे पर एक साथ नहीं बनता है, जिसके कारण व्यक्ति को दूर या पास की वस्तु धुंधली दिखाई देती है। इस प्रकार के दोष को दृष्टि दोष कहते हैं।
दृष्टिदोष के प्रकार
नागरिक अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष मित्तल ने बताया कि दृष्टिदोष दो प्रकार का होता है। इसमें मायोपिया या निकट दृष्टि दोष व हाईपरमेट्रोपिया या दूर दृष्टि दोष शामिल है। मायोपिया या निकट दृष्टि दोष से प्रभावित व्यक्तियों को दूर की वस्तु धुंधली दिखाई पड़ती है। मायोपिया या निकट दृष्टि दोष सामान्यत: बचपन से शुरू होता है और स्कूल में जा रहे बच्चों में ज्यादा देखा जाता है। इस दोष को नेगेटिव नंबर का चश्मे पहनकर ठीक किया जा सकता है। हाईपरमेट्रोपिया या दूर दूर दृष्टि दोष वाले व्यक्तियों को दूर और पास दोनों वस्तुओं को देखने में कठिनाई होती है। इस दोष को प्लस चश्मे से ठीक किया जा सकता है।
बच्चों में दृष्टि दोष के लक्षण
- धुंधला या अस्पष्ट दिखाई पड़ना।
- नजदीक का काम करने समय सिर दर्द।
- आंख पर दबाव या पानी आने की शिकायत।
- ब्लैक बोर्ड पर लिखे अक्षरों का साफ दिखाई न देना।
- टीवी को नजदीक से देखना।
- दूर की वस्तुओं को देखते समय आंखों को सिकोड़ना।