यमुना से सटे अराईपुरा, लालूपुरा, कैलरम, कैरवाली, अमृतपुर कलां और अमृतपुर खुर्द गांव में चल रहे चकबंदी विवाद के बाद मंगलवार को स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। लालूपुरा में विवादित जमीन से धान की फसल काटने पर गुस्साए पीड़ित किसानों ने जमकर बवाल काटते हुए तोड़फोड़ की।
किसानों ने खेतों में बने अस्थाई कमराें को ध्वस्त कर दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने चेताया कि अगर समय रहते प्रशासन ने उन्हें न्याय नहीं दिलवाया तो महिलाएं आत्महत्या करने पर मजबूर हाेंगी। वहीं, तोड़फोड़ करने के विरोध मे दूसरे पक्ष के लोग जिला उपायुक्त से मिले और मामले की जांच के लिए गुहार लगाई।
जिला उपायुक्त के निर्देश पर एसडीएम मुकुल कुमार, तहसीलदार हरिओम अत्री सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और पीड़ित किसानों से चार घंटे तक बातचीत की। प्रशासन ने पीड़ित किसानों को दोे दिन बाद रोहतक मंडल के कमिश्नर से मिलवाने का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया।
प्रशासन ने मौके पर 144 की धारा लगा दी है। सोमवार को पीड़ित किसान अपनी मांगों के लिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर महामहिम के नाम ज्ञापन देने गए थे। पीछे से दूसरे पक्ष के कुछ लोगों ने धान की फसल काट ली। फसल काटने पर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्हाेंने मंगलवार को पूरा बवाल काटते हुए जमकर नारेबाजी की व खेतों में नलकू पों में बने अस्थाई कमरों का तोड़ डाला।
दूसरे पक्ष के लोगों को जैैसे ही भनक लगी तो वे जिला उपायुक्त से मिलने करनाल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी दी। जिला उपायुक्त ने एसडीएम करनाल मुकुल कुमार व तहसीलदार हरिओम अत्री को भारी पुलिस बल के साथ भेजा। प्रशासन ने मामले को निपटाने का पूरा प्रयास किया और ग्रामीणों को दो दिन का समय देकर शांत किया।
लगभग चार घंटे की जद्दोजहद के बाद पीड़ित किसानों ने प्रशासन की बात मान ली। एसडीएम मुकुल कुमार ने बताया कि कुछ ग्रामीणों ने चकबंदी की विवादित जमीन पर तोड़फोड़ करने की शिकायत दी थी, जिस पर प्रशासन मौके पर पहुंचा। उन्हाेंने बताया कि दो दिन बाद रोहतक मंडल कमिश्नर करनाल में इस मामले की सुनवाई के लिए आएंगे और किसान अपनी समस्या उनके समक्ष रखेंगे।
धारा 144 लगा दी गई है। प्रशासन को जैसे ही ग्रामीणों की ओर से तोड़फोड़ करने की सूचना मिली तो एसडीएम, तहसीलदार, थाना अध्यक्ष भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और देखते ही देखते पूरा घटनास्थल पुलिस छावनी में तबदील हो गया। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए चारों और पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस बल, फायरब्रिगेड, एंबुलेंस व वाटर केनन की गाड़ियां तैनात कर दी गई थी।
दूसरा पक्ष भी सड़कों पर उतरा
विवादित चकबंदी मामले में मंगलवार को दूसरे पक्ष ने उपायुक्त दरबार में जमीन का कब्जा दिलाने की मांग की। तीन गांवों अमृतपुर खुर्द व कलां और कैरवाली के ग्रामीणों ने कहा कि उनकी जमीन की चकबंदी उनके नाम होने के बावजूद कब्जा नहीं हटाया जा रहा है। प्रशासन से इनकी मांग थी कि उनकी जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाए।
मंगलवार को ग्रामीण उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। तीन गांव से आए ग्रामीणों का कहना था कि उनकी चकबंदी गलत कर दी गई थी। इसके लिए ग्रामीणों ने डीसी से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ा और अपना पक्ष रखा। अदालत ने उनके पक्ष का समर्थन करते हुए फैसला उनके पक्ष में दिया।
दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट तक केस हारने के बावजूद हंगामा बरपा रहा हैं। इसकी वजह से उनकी जमीन उन्हें नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह उनकी जमीन का कब्जा उन्हेें दिलाए ताकि वह अपनी फसल उगा सकें। इस मामले में उपायुक्त ने भरोसा दिया है कि वह मामले में उचित कार्रवाई करेंगे।
चकबंदी मामले में धारा 144 लागू
जिलाधीश विकास यादव ने गांव अमृतपुर कलां, अमृतपुर खुर्द, कालरम, लालूपुरा, डेरा भरतपुर, अराईंपुरा और कैरवाली में शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लागू कर दी है।
चकबंदी विवाद के चलते प्रशासन ने यह फैसला लिया है। इसमें पांच या इससे अधिक व्यक्तियों के एक जगह इकट्ठा होने और अपने साथ तलवार, बरछा, कुल्हाड़ी, जेली, लाठी, गंडासा, चाकू और अन्य घातक हथियार साथ लेकर चलने पर रोक लगा दी गई है।
इन गांवों के निवासी, जिनके पास शस्त्र हैं, उन्हें आर्म्स एक्ट-1968 के तहत संबंधित पुलिस स्टेशन और वैद्य शस्त्र डीलरों के पास जमा कराने होंगे। यह आदेश अगले दो माह तक लागू रहेंगे।