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दो साल में 117 हत्याएं, 148 दुराचार

Tue, 08 Apr 2014 12:16 AM IST
करनाल
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लोकसभा चुनाव में भले ही राष्ट्रीय मुद्दे अहम होते हों, लेकिन करनाल जिले का सबसे बड़ा मुद्दा तो इस बार कानून व्यवस्था का है। पुलिस विभाग के आंकड़े खुद-ब-खुद अपनी कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था के दावोें की पोल खोल रहे हैं। एक साल में यहां हर हफ्ते एक हत्या हुई तो हर हफ्ते एक महिला की आबरू तार-तार हुई।
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सड़क चलते छेड़छाड़, पर्स स्नेचिंग की घटनाओं से शहर की महिलाओं सहमी हैं। आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। वर्ष 2012 और 2013 के आंकड़ों पर गौर करें तो इन दो साल में 117 हत्याएं हुईं। 148 बलात्कार हुए, 242 चेन-पर्स स्नेचिंग और 42 घटनाएं छेड़छाड़ की हुई।

एडवोकेट राजेश शर्मा ने आरटीआई के तहत पुलिस विभाग से जानकारी हासिल की, जिसमें यह आंकड़े सामने आए। वर्ष 2014 में अभी तक करीब दस लोगाें की हत्या हो चुकी है। 15 महिलाएं बलात्कार का शिकार हो चुकी हैं और दो दर्जन से ज्यादा चेन व पर्स स्नेचिंग की वारदात घट चुकी हैं।
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एडवोकेट राजेश शर्मा ने कहा कि जिला की कानून व्यवस्था न केवल आज सवालों के घेरे में है, बल्कि आम आदमी ने सोचना शुरू कर दिया है कि भविष्य में उनका और उनके बच्चों का क्या होगा। यह तथ्य न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि आम व्यक्ति के मन में भय पैदा करते हैं।

आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे
एडवोकेट राजेश शर्मा का कहना है कि कानून व्यवस्था पुलिस के हवाले होती है, जिसका फर्ज है कि वह नगर के लोगों को भय मुक्त रखें और असामाजिक तत्त्वों पर लगाम कसे, लेकिन वर्तमान व्यवस्था इस तथ्य को साफ तौर पर दर्शा रही है कि पुलिस केवल वीआईपी लोगों की सुरक्षा में लगी रहती है। वीआईपी के आने और जाने के बाद घंटों इलाके की सुरक्षा में लगी रहती है। इस दौरान भी घंटों तक आम नागरिकों को परेशान किया जाता है।

महिलाएं खौफजदा, दहशत में परिवार
आज के दिन महिलाएं असामाजिक तत्त्वों से परेशान हैं। आये दिन नगर में चेन स्नेचिंग कई-कई घटनाएं घट जाती हैं, जिससे महिलाओं में भय की स्थिति व्याप्त है। उनका घर से निकलना दूभर हो चुका है। असामाजिक तत्व भरे बाजारों से उनके पर्स और चेन छीन कर ले जाते हैं। भरे बाजारों से कारों की चोरी और उसमें रखें समान व पैसे चुराना आम बात हो गई है। चोर पुलिस चौकी के सामने दिनदहाड़े ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर साफ निकल जाते हैं।

नहीं लगे सीसीटीवी
पुलिस प्रशासन लंबे समय से दावे करता आ रहा है कि शहर की सुरक्षा और निगरानी के लिए मुख्य सड़कों व चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। बड़े प्रतिष्ठानों को छोड़कर न तो अभी तक सड़कों  चौराहों पर कैमरे लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा पुख्ता हुई है।
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