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चौधर की चाह में छोड़ी परीक्षा, चुनाव प्रचार में डटे रहे अभ्यर्थी

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करनाल। गांव में चुनाव प्रचार करते युवा। संवाद
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गगन तलवार
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करनाल। करीब दो साल के इंतजार के बाद पंचायती राज चुनाव और करीब एक साल तक तिथि आगे बढ़ने के बाद सीईटी यानी सामान्य पात्रता परीक्षा आयोजित हुई है। लेकिन चौधर की चाहत रखने वाले युवाओं ने नौकरी के लिए हुई यह परीक्षा छोड़ दी है। फिलहाल वे चुनाव प्रचार में डटे हैं। उनका पहला मकसद चुनाव में जीत दर्ज करके घर में चौधर लाना है।
इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दो दिनों की परीक्षा में 30.3 प्रतिशत अभ्यर्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे। करीब इतने ही अभ्यर्थी परीक्षा देने के लिए करनाल से भी नहीं गए। इनमें ज्यादातर अभ्यर्थी ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। वहीं करनाल जिले के भी करीब सात से आठ हजार ग्रामीण युवा परीक्षा देने नहीं गए। इसके पीछे की वजह चुनाव और परीक्षा नजदीक होना माना जा रहा है। क्योंकि दूसरे चरण में 9 और 12 नवंबर को पंचायती चुनाव है। ऐसे में जिन परिवारों के सदस्य चुनावी मैदान में हैं, उनके लिए घर के युवा प्रचार प्रसार में डटे हैं। एनटीए और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की व्यवस्था के अनुसार चुनावी जिले करनाल के युवाओं को सात जिलों में परीक्षा देने के लिए जाना था। जबकि चार चुनावी जिलों के अभ्यर्थियों के लिए करनाल जिले में परीक्षा केंद्र बने थे। ब्यूरो
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परीक्षा अगली बार, चुनाव हारे तो पांच साल इंतजार
करनाल खंड के अखिलेश, इंद्री के प्रवीण और अर्जुन व कुंजपुरा के विवेक और शंकर की सीईटी की परीक्षा थी। लेकिन इनके परिवार के सदस्य जिला परिषद, ब्लॉक समिति या पंच का चुनाव लड़ रहे हैं। इसी सप्ताह में मतदान है और चुनाव से एक दिन पहले प्रचार थम जाएगा। ऐसे में प्रचार कार्य में डटे ऐसे कई युवाओं ने परीक्षा छोड़ दी। उनका कहना है कि परीक्षा वे अगली बार दोबारा पंजीकरण कराकर दे देंगे। लेकिन चुनाव पांच साल बाद आएगा। यदि यहां कमी रह गई तो इंतजार करना पड़ेगा।
चुनाव और परीक्षा एक साथ नहीं होने चाहिए थे
अर्जुन, शुभम और प्रवीण व अन्य का कहना है कि परीक्षा और चुनाव एक साथ नहीं रखे जाने चाहिए थे। अच्छा होता परीक्षा या चुनाव में से एक को आगे या पीछे कर दिया जाता। इससे ऐसे युवाओं को भी परीक्षा में बैठने का मौका मिलता। जिनके परिवार के सदस्य चुनावी मैदान में हैं। क्योंकि लड़कियों को दूर के केंद्र में परीक्षा के लिए अकेला भेजना मुश्किल होता है। हो सकता है कई बेटियां भी चुनाव के कारण परीक्षा से वंचित रह गई हों।
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यह रही स्थिति
रोडवेज के जीएम कुलदीप से मिली जानकारी के अनुसार करनाल में बने 48 केंद्रों पर परीक्षा देने के लिए कैथल, भिवानी, यमुनानगर, जींद के अलावा चुनावी जिले हिसार, कुरुक्षेत्र, अंबाला और गुरुग्राम से अभ्यर्थी पहुंचे। जबकि करनाल के युवाओं के लिए पंचकूला, चंडीगढ़, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, पानीपत और कुरुक्षेत्र सहित सात जिलों में केंद्र बनाया गया था। दोनों दिन में करनाल में 87360 अभ्यर्थियों में से 30.3 प्रतिशत यानी 26441 अनुपस्थित रहे। जबकि करीब 40 हजार करनाल के युवाओं को बाहर जाना था, इसी हिसाब से बसें लगाई थी। कम अभ्यर्थी जाने के कारण कई बसें चलाने की जरूरत नहीं पड़ी।
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