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न पीने को पानी न बैठने को सीट

Sat, 06 Jun 2015 01:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला करनाल
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम है। मरीजों को इलाज तो दूर की बात है पानी और बैठने के लिए बैंच तक नहीं मिल रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज की दूसरी मंजिल पर पानी का संकट गहरा गया है। दूसरा मरीजों के लिए पंखों की व्यवस्था तो है, लेकिन कूलर नहीं हैं, ऐसे में मरीजों के गर्मी में पसीने छूट रहे हैं। इस विकट स्थिति को देख बहुत से मरीज सरकारी व्यवस्था को कोसते हुए प्राइवेट अस्पताल की ओर रुख कर रहे हैं।

यही कारण है कि अस्पताल में रोजाना मरीज हंगामा करते हैं और झगड़े होते हैं। वीरवार को भी अल्ट्रासाउंड करवाने आई सुनीता, सविता, रानी, प्रीत कौर, दर्शना सहित दर्जनों महिलाएं ने दोपहर बाद जमकर हंगामा किया और डायरेक्टर के आदेश के बाद उनका अल्ट्रासाउंड किया गया।
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यह कहानी मेडिकल कॉलेज में रोजाना की है। करनाल सहित आसपास के जिले के लोगों के लिए मेडिकल कॉलेज महत्वपूर्ण है। यहां पर मरीजों की ओपीडी 1800 है और सभी मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। मेडिकल कॉलेज में वीआईपी के आगमन पर सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। 44 डिग्री तापमान में भी मरीजों को न ठंडा पानी मिलता है और न ही ठंडी हवा। लू के थपेड़े मरीजों को वार्डों में लग रहे हैं। पंखे गर्म हवा दे रहे हैं और सभी मरीजों व वार्डों में कूलर की व्यवस्था भी नहीं है।

मरीज से मिलने वालों के लिए नहीं बैठने की व्यवस्था
1800 ओपीडी वाले अस्पताल में पानी का संकट छा जाना अधिकारियों की गंभीर लापरवाही है। मरीजों के आसपास उनके रिश्तेदार या एक सदस्य अवश्य साथ में होता है। ऐसे में मरीजों के साथ उनके जानकारों की संख्या पांच हजार रहती है। मरीजों से मिलने वालों के लिए भी बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। फर्श पर बैठकर वह दुख तकलीफ बतलाते हैं। गर्मी में फर्श भी गर्म रहने से मरीजों व उनके जानकार बहुत परेशान होते हैं। मरीज शिकायत करते हैं, लेकिन व्यवस्था पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। इतना ही नहीं अपनी बारी का इंतजार करने के लिए भी कालेज में बैठने के लिए स्थान नहीं है। पर्ची बनवाने से लेकर इलाज तक मरीजों को खड़ा रहना पड़ता है। दवा खिड़की व पर्ची खिड़की के पास भी बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है।  

अस्पताल से बाहर से लेकर आते हैं पानी
अस्पताल में पानी संकट होने के कारण मरीज और उनके जानकारों के लिए पानी अस्पताल से बाहर से लेकर आते हैं। मरीज सुल्तान सिंह ने बताया कि बोतल में अधिक देर ठंडा पानी नहीं रहने के कारण मरीज का एक साथी सिर्फ पानी ढोने पर लगा रहता है। अस्पताल के गेट पर लगे वाटर कूलर या नजदीक ही ब्राह्मण धर्मशाला से पानी लेकर आते हैं। यह समस्या एक दिन की नहीं है, बल्कि पूरी गर्मी मरीजों को इस समस्या से दो चार होना पड़ेगा। बता दें कि अस्पताल का पानी स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने चेक किया था तो दूषित मिला था। बाद में प्रबंधन ने पानी को साफ करने के लिए आरओ लगाए थे। हालांकि, अब भी कई स्थानों पर पानी की किल्लत है।

अल्ट्रासाउंड, एक्सरे के लिए कई दिन का इंतजार
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे व सिटी स्कैन की सुविधा अहम है। इनके रोजाना 90 से 100 मरीज आते हैं। अलसुबह भूखे पेट आते हैं, लेकिन दोपहर तक नंबर न आने पर हंगामा करते हैं। इन स्थानों पर एक-एक डॉक्टर तैनात है। जिस भी दिन एक डॉक्टर छुट्टी पर रहता है तो उक्त मरीज को वह सुविधा नहीं मिल पाती। इसके लिए उसे अगले दिन आना पड़ता है। इससे मरीज के कई दिन चक्कर लगाने में निकल जाते हैं और बीमारी बढ़ती जाती है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे नि:शुल्क किए जाते हैं और सिटी स्कैन के नाममात्र फीस लगती है। प्राइवेट अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड के 700 रुपये, एक्सरे के 150 रुपये व सिटी स्कैन के 3500 रुपये के रेट बनाए हुए हैं।

कई बार लापरवाही आ चुकी है सामने
मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की लापरवाही भी कई शर्मसार रही हैं। तड़पती महिलाओं का इलाज नहीं किया गया। एक महिला ने ट्रामा सेंटर के बाहर बैंच पर बच्चे को जन्म देना पड़ा था और अस्पताल में आए लोगों ने उसकी सहायता की। इसके बाद एक महिला को प्रसव के दौरान ध्यान नहीं देने से महिला को टायलेट में ही बच्चा हो गया और बच्चे की मौत हो गई थी। इसके अलावा दो गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है। पीड़ित लोग हंगामा के अलावा अस्पताल के शीशे तोड़ चुके हैं। व्यवस्थाएं आज तक नहीं सुधारी गई।

कोट  
मेडिकल कॉलेज में जो व्यवस्था है उसके मुताबिक मरीजों को सुविधाएं दे रहे हैं। निर्माण कार्य के चलने के दौरान कई बार पाइप कट जाती है। मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद व्यवस्था पूर्ण हो जाएंगी। बैठने के लिए और पानी की पूरी व्यवस्था है। अगर बैंचों की कमी है तो इसे दूर किया जाएगा।
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- डॉ. सुरेंद्र कश्यप, डायरेक्टर, मेडिकल कॉलेज करनाल।
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