करीब दो साल पहले करनाल नगर निगम में मेयर के चुनाव में पार्षदों की कथित
खरीद फरोख्त का जिन्न आरोपों के रूप में बाहर आ गया है। हालांकि, इस तरह की
अटकलें व अफवाहें पहले भी कई बार शहर में चलती रही हैं, लेकिन अब इसका
खुलासा खुद निगम के डिप्टी मेयर मनोज वधवा ने किया है।
डिप्टी मेयर के एक
धार्मिक कार्यक्रम में दिए गए बयान को आधार बनाते हुए युवा बोलेगा मंच ने
मेयर चुनाव की पूरी प्रणाली पर सवाल उठाते हुए इस मामले की जांच की मांग कर
सियासत को गरमा दिया है। मंच ने आरोप लगाया कि चुनाव में एक एक पार्षद की
डेढ़-डेढ़ करोड़ में खरीद फरोख्त हुई है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
मंच
ने यह भी दावा किया है कि वे जल्द ही इस पूरे मामले की पोल खोलेंगे और यह
भी जनता के सामने रखेंगे कि किस पार्षद ने कितने पैसे लिए। उधर, दो साल के
बाद मामला सामने आने पर निगम की राजनीति में भी खलबली मच गई है व शहर के
लोगों में यह चर्चा का विषय बना है।
शुक्रवार को मानव सेवा संघ में
आयोजित प्रेस वार्ता में युवा बोलेगा मंच के अध्यक्ष एडवोकेट जेपी शेखुपुरा
ने दावा किया कि वर्ष 2013 में हुए निगर निगम मेयर और डिप्टी मेयर के
चुनाव में चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई गईं और इसमें भ्रष्टाचार का
बोलबाला रहा। शेखपुरा ने दावा कि एक एक पार्षद की डेढ़ करोड़ रुपये तक
बोली लगाई गई। कुछ को एडवांस दिया गया तो कुछ को बाद में पैसे दिए गए।
उन्होंने दावा किया कि आगामी सप्ताह में वे उन पार्षदों की लिस्ट भी जनता
के सामने रखेंगे। कुछ के दस्तावेज उनके पास आ चुके हैं, जबकि कुछ के बाकी
हैं। शेखुपुरा का कहना है कि जब मेयर चुनाव में करोड़ों रुपये की
खरीद-फरोख्त हुई तो शहर में विकास कैसे होगा? उन्होंने सीएम से मांग की इस
पूरे प्रकरण की जांच की जाए, अगर जांच नहीं हुई वे सबूतों के साथ अदालत का
दरवाजा खटखटाएंगे।
यह है मंच की मांग
1. मेयर और पार्षदों की आय से अधिक संपत्ति मामले की भी जांच हो।
2. निगम को भंग किया जाए, दोबारा से हो चुनाव।
3. केबल टैक्स रिकवर किया जाए और सभी कनेक्शनों को ऑनलाइन किया जाए।
4. शहर में लग रही इंटरलॉकिंग टाइलों की जांच की जाए, मिलीभगत की आशंका।
डिप्टी मेयर से भी मांगा इस्तीफा
एडवोकेट
शेखुपुरा ने दावा किया कि एक धार्मिक कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से
डिप्टी मेयर मनोज वधवा ने यह स्वीकार किया है कि मेयर के चुनाव में
पार्षदों की खरीद-फरोख्त हुई थी। ऐसे में उनको अपने पद से इस्तीफा दे देना
चाहिए। जानकारी में मामला होने के बाद वह इतने दिनों बाद क्यों बोले।
मेरे
सामने पार्षदों के खरीद-फरोख्त की बात हुई थी, मुझे नहीं पता किसको क्या
दिया गया या नहीं। कुछ दिनों पहले में एक सत्संग समारोह में मुख्य अतिथि
था, वहां पर भगवान शिव को साक्षी मानकर मैंने संकल्प लिया है कि वे न तो भी
रिश्वत लेंगे और न ही देंगे। हां, एक बात का पश्चाताप भी किया है, उस समय
पार्षदों की खरीद फरोख्त के मामले में मुझे इसका विरोध करना चाहिए था।
रिश्वत लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। मैं अपनी बात पर आज भी कायम हूं मैं
निगम चुनाव नहीं लड़ना चाहता था, लेकिन पार्टी के कहने पर मैंने चुनाव
लड़ा।
मनोज वधवा, डिप्टी मेयर व इनेलो नेता।
लोकतंत्र
में सभी को अपनी बात कहने का हक है, लेकिन बात हमेशा तथ्यों पर करनी
चाहिए। वैसे सभी आरोप निराधार और बेतुके हैं। मेयर पद का चुनाव पूरे
प्रशासन की देखरेख में लोकतंत्र तरीके से हुआ है, जिसमें पार्षदों ने मुझे
चुना है। अगर कोई खरीद फरोख्त के आरोप लगा रहा है तो इसकी जांच होनी चाहिए,
ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
रेणु बाला गुप्ता, मेयर।