अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विमल सपरा की अदालत ने किसानों की
अधिगृहीत भूमि की मुआवजा राशि को 475 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये प्रति वर्ग
गज की दर से देने का आदेश दिया है। किसानों को मुआवजे के अतिरिक्त अन्य
सभी लाभांश भी मिलेंगे। यह फैसला किसानों को राहत प्रदान करने वाला है।
अदालत ने यह निर्णय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा केस को फिर
जिला न्यायालय को पुनर्विचार के लिए भेजे जाने पर सुनाया है। किसानों की
पैरवी कर रहे अधिवक्ता शक्ति सिंह ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने
सेक्टर-3, इंडस्ट्रियल एस्टेट के विस्तार के लिए 27 नवंबर, 2002 को गजट
अधिसूचना जारी कर करनाल के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया था। भूमि
अर्जन कलेक्टर ने पांच लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने का
अवार्ड सुनाया था। इस अवार्ड के खिलाफ सेशन कोर्ट ने 475 रुपये प्रति वर्ग
गज की दर से मुआवजा देने का फैसला किया था। इस फैसले के खिलाफ किसानों ने
मुआवजा राशि को बढ़वाने और एचएसआईआईडीसी ने मुआवजा राशि को घटवाने के लिए
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में गुहार लगाई थी। इस पर हाईकोर्ट ने
दोनों पक्षों को सुनने के बाद केस को पुनर्विचार के लिए जिला न्यायालय को
भेज दिया था। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विमल सपरा की अदालत ने
किसानों की ओर से अधिवक्ता शक्ति सिंह एवं सरकारी पक्ष को सुनने के बाद
अधिगृहीत भूमि की मुआवजा राशि को 475 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये प्रति वर्ग
गज की दर से देने का फैसला किया है।