स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर बनाया गया प्रोटोकॉल असंध में टूट गया।
कार्यक्रम में सत्ता और सियासत हावी रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसडीएम
सुशील मलिक ने झंडा फहराया, जबकि मुख्य संसदीय सचिव बख्शीश सिंह के बेटे
हरप्रीत सिंह ने एसडीएम के साथ जिप्सी में परेड का निरीक्षण किया और सलामी
ली।
उधर, प्रोटोकाल के उल्लंघन को लेकर विपक्षी दलों ने एसडीएम समेत सीपीएस
पर हमला बोल दिया है। विपक्षी दलों ने कार्रवाई की मांग की है। दरअसल,
नई अनाज मंडी ग्राउंड में उपमंडलस्तरीय कार्यक्रम था। इसमें एसडीएम सुशील
मलिक मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में भी कहीं पर सीपीएस के
बेटे का नाम नहीं था। एसडीएम ने झंडा फहराया और फिर एसडीएम ने परेड का
निरीक्षण करना था।
आवभगत के चक्कर में एसडीएम ने सीपीएस के बेटे को भी
जिप्सी में चढ़ा लिया। इस दौरान जिप्सी में डीएसपी बलजिंद्र सिंह भी साथ
रहे। सीपीएस के बेटे हरप्रीत सिंह डीएसपी के बिलकुल साथ खड़े रहे और परेड
का निरीक्षण कर सलामी ली।
यह है नियम
नियमानुसार जिन जिलों में
सरकार का कोई प्रतिनिधि मुख्य अतिथि नहीं होता तो वहां के डीसी झंडा फहराते
हैं। इसी प्रकार उपमंडल पर एसडीएम और तसहील स्तर पर तहसीलदार झंडा फहराते
हैं। कानून के जानकार बताते हैं कि ऐसा इसलिए किया है क्योंकि यह कोई
राजनीति कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि देश का कार्यक्रम होता है। इसी प्रकार
परेड का निरीक्षण, सलामी और झंडा फहराने की रस्म भी मुख्य अतिथि ही करते
हैं, जबकि असंध में ऐसा नहीं किया गया।
कार्यक्रम में मैं खुद
मुख्य अतिथि था। तिरंगा झंडा भी मेरे ही द्वारा फहराया गया। जहां तक सीपीएस
बख्शीश सिंह के बेटे हरप्रीत सिंह की बात है, उन्हें विशिष्ट अतिथि के तौर
पर बुलाया गया था। वे तो जिप्सी में पीछे खड़े थे। जहां तक मुझे जानकारी
है, इसमें कोई दिक्कत नहीं है? हालांकि वे इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए कि
आखिर प्रदेश के अन्य उपमंडलों में केवल एसडीएम ने ही सलामी क्यों ली?
-डॉ. सुशील मलिक, एसडीएम, असंध
कार्यक्रम
में मुझे बतौर विशिष्ट अतिथि बुलाया गया था। इसलिए मैं कार्यक्रम में
पहुंचा था। जिप्सी में चढ़ने के लिए अधिकारियों ने कहा था तो मैं चढ़ गया।
-हरप्रीत सिंह विर्क, पुत्र सीपीएस