संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। न्यू रमेश नगर एक्सटेंशन पार्ट-दो में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए सर्वेश कृष्ण शास्त्री ने, आके बैठ जरा ठाकुर जी के चरणों में, जग एक सपना है यहां कोई नही अपना है... भजन गाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रभु को पाना है तो उसका होना पड़ेगा, ध्यान लगाना पड़ेगा।
सर्वेश कृष्ण शास्त्री ने श्रीकृष्ण की रासलीला का वर्णन करते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा की रात को श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाई तो सभी गोपियां चाहे वो आटा गूथ रही थी वो आटे में धंसे हाथ लेकर दौड़ पड़ी, तो कोई घर की पुताई करती हुईं दौड़ पड़ीं, कही शृंगार कर रही गोपी ने तो कमाल कर दिया होठों पर लगाने वाली वस्तु को मुंह पर लगा लिया सभी कन्हैया जी की मुरली सुनने को दौड़ पड़ी। एक गोपी को उसके पति ने कमरे में बंद कर दिया तो उसने अपने प्राण त्याग दिए और आत्मा उनके पास पहुंच गई। रासलीला, कृष्ण और गोपियों के बीच का एक दिव्य प्रेम है। रास का अर्थ है अमृत और लीला का अर्थ है नृत्य या क्रीड़ा।रासलीला में कृष्ण अलौकिक रूप से एक कल्प की लंबाई तक समय बढ़ा देते हैं। वृंदावन के निधिवन में हर रात रासलीला होती है।
निधिवन के पेड़ों की मान्यता है कि ये रात में गोपियां बन जाते हैं और कृष्ण और राधा के साथ नृत्य करते हैं। रासलीला में कृष्ण को छोड़कर किसी अन्य मर्द का वहां जाना निषेध था। भगवान शिव ने महिला के वेश में रास के दर्शन किए थे। इस अवसर पर अशोक अरोड़ा, पारस, भारत, देव राज , अनिल, तुषार, सतपाल चौहान, सुनील, रजत, जसविंदर, सुरेश, आशीष , अभिषेक,अमित और अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।