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Karnal News: सफेद दाग छह माह में ठीक न होने पर सर्जरी से इलाज संभव

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- नागरिक अस्पताल की त्वचा रोग ओपीडी में रोजाना 10 से 15 मरीज सफेद दाग की समस्या से जुड़े पहुंच रहे
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विश्व विटिलिगो दिवस आज


संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। लगातार दवाओं और अन्य इलाज के बावजूद छह महीने के अंदर सफेद दाग में कुछ भी सुधार नहीं होता है तो साल के भीतर सर्जरी का विकल्प अपनाना जरूरी है। सर्जरी में मुख्य रूप से स्किन ग्राफ्टिंग पद्धति अपनाई जाती है। इसमें शरीर के जिस हिस्से पर सफेद दाग है, वहां स्वस्थ त्वचा की कोशिकाएं प्रत्यारोपित की जाती हैं। कुछ मामलों में ब्लिस्टर ग्राफ्टिंग भी की जाती है, जिसमें शरीर के स्वस्थ हिस्से पर बुलबुले (ब्लिस्टर) बनाकर उनकी ऊपरी परत प्रभावित हिस्से पर लगाई जाती है। सर्जरी हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होती। यह तभी की जाती है जब सफेद दाग स्थिर हो जाए और कम से कम छह महीने से नए दाग न उभरे हों। सर्जरी का निर्णय मरीज की त्वचा की स्थिति देखकर ही लेते हैं।
सफेद दाग यानी विटिलिगो को लेकर समाज में कई भ्रांतियां हैं, जबकि डॉक्टरों का मानना है कि यह न तो छूने से फैलता है और न ही लाइलाज है। जिला नागरिक अस्पताल की त्वचा रोग ओपीडी में रोजाना 10 से 15 मरीज सफेद दाग की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या युवतियों की है, जिनमें शादी-ब्याह और कॅरिअर को लेकर मानसिक तनाव ज्यादा देखा जा रहा है।
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जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप मान ने बताया कि विटिलिगो में त्वचा की रंग बनाने वाली कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं, जिससे सफेद धब्बे उभरने लगते हैं। यह समस्या केवल रंग तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई बार इसका मनोवैज्ञानिक असर मरीज पर गहरा पड़ता है। खासकर युवतियों में होती है क्योंकि उनके शरीर पर बाल कम होते हैं। इससे आत्मविश्वास में गिरावट और सामाजिक उपेक्षा देखने को मिलती है। डॉ. प्रदीप का कहना है कि यह एक ऑटो इम्यून रोग है और जब त्वचा में रंग बनाने वाली कोशिकाएं यानी मेलेनोसाइट खत्म हो जाती हैं या काम करना बंद कर देती हैं, तो उस हिस्से पर सफेद धब्बे नजर आने लगते हैं।
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मेलेनोसाइट खत्म क्यों होती हैं?
डॉ. प्रदीप का कहना है कि मेलेनोसाइट खत्म होने का कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली की गड़बड़ी (ऑटोइम्यून समस्या), वंशानुगत कारण यानी कि परिवार में किसी को पहले होना, थायरॉइड या अन्य हार्मोनल असंतुलन, मानसिक तनाव या भावनात्मक सदमा, त्वचा पर पुरानी चोट या जलन और कुछ मामलों में रासायनिक पदार्थों या धूप के अत्यधिक संपर्क से नुकसान होना है। डॉ. प्रदीप ने बताया कि विटिलिगो शरीर के उन हिस्सों पर ज्यादा नजर आता है, जो खुले रहते हैं या जहां त्वचा संवेदनशील होती है। चेहरा, गर्दन, हाथ-पैर, उंगलियों के सिरे, होंठ, आंखों के आसपास, यहां तक कि सिर के बाल, दाढ़ी या भौंहों पर सफेद धब्बे होते हैं। कुछ मामलों में प्राइवेट पार्ट्स के आसपास भी यह समस्या देखी जा रही है। चेहरा और गर्दन जैसे हिस्सों पर इलाज का असर जल्दी दिखने की संभावना होती है। जबकि हाथ-पैर, उंगलियों, होंठों या प्राइवेट पार्ट्स के आसपास के सफेद दागों को ठीक होने में ज्यादा समय लगता है। यही वजह है कि डॉक्टर नियमित इलाज के साथ धैर्य रखने की सलाह देते हैं।


सफेद दाग के सुरक्षित इलाज-

- त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह से क्रीम और मलहम का इस्तेमाल।

- दवाओं के जरिये रोग प्रतिरोधक प्रणाली को संतुलित करना।

- विटामिन-बी-12, फोलिक एसिड और कॉपर जैसे पोषक तत्वों की कमी पूरी करना।

- एक साल इलाज के बाद भी सुधार न होने पर सर्जरी (स्किन ग्राफ्टिंग) विकल्प।

- स्टेरॉयड क्रीम या दवा, या इंटरनेट पर दिखाए गए बिना प्रमाणित इलाज से बचना जरूरी।
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