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स्कूल के मैदान में बेटी के पांव में चुबे कंकड़ तो पिता ने पांच एकड़ में बनवाया ट्रेक

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स्कूल के मैदान में दौड़ का अभ्यास करने के दौरान बेटी के पांव में कंकड़ चुभे तो पिता ने उसके लिए 400 मीटर का ग्रास ट्रैक बनवा दिया, जिसमें बेटी ही नहीं क्षेत्र के अन्य एथलीट भी अभ्यास कर सकें। यही नहीं बेहतर खिलाड़ी तैयार करने के लिए नेशनल स्तर का कोच भी तैनात कर दिया। अब दो साल बाद यहां के खिलाड़ियों ने राज्य ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिभा की छाप छोड़ी है। इन्हीं खिलाड़ियों में शामिल हैं निर्मल पुनिया और रीतिका शर्मा, जिन्होंने रविवार को 34 वीं हरियाणा स्टेट जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर बाधा दौड़ में पहला और दूसरा स्थान प्राप्त किया है। बात हो रही है हिसार के खरक पुनिया गांव निवासी राममेहर पुनिया की।
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34वीं हरियाणा स्टेट जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने के लिए ग्रास ट्रैक पर अभ्यास करने वाले बच्चों के साथ पहुंचे राममेहर पुनिया ने बताया कि दो साल पहले वह अपनी बेटी रिंकू पुनिया को रेस का अभ्यास करवाने के लिये गांव के सरकारी स्कूल में गये थे। स्कूल में बेटी के पांव में कंकड़ चुभ गये, जिससे उसे काफी परेशानी हुई। इसके बाद उन्होंने खुद की जमीन पर ग्रास ट्रैक बनवाने का निर्णय लिया। खेत में धान की फसल होने के कारण उन्होंने दो माह का इंतजार किया। जैसे ही फसल कटी उन्होंने
पांच एकड़ निजी भूमि पर गांव के बच्चों के लिये 400 मीटर का ग्रास ट्रैक तैयार करवाया।
बच्चों के प्रशिक्षण में कोई कमी न रह जाए इसके लिये गांव के ही नेशनल ब्रांस मेडलिस्ट प्रदीप पुनिया को कोच नियुक्त किया। मौजूदा समय में उनके पास करीब 70 एथलेटिक्स लड़के और लड़कियां प्रशिक्षण लेते हैं। गांव के ग्रास ट्रैक से कई नेशनल खिलाड़ी जिले का नाम रोशन कर चुके हैं। गांव के बच्चों को अभ्यास करता देख अन्य गांव जैसे मतलौडा, सहरेड़ा, बदावड़, सरसाना आदि आस पास गांव के खिलाड़ी भी सुबह और शाम प्रशिक्षण लेने आते हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार को वह अपने खिलाड़ियों के साथ कर्ण स्टेडियम करनाल में आयोजित 34वीं हरियाणा स्टेट जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने पहुंचे थे। बता दें कि इस प्रतियोगिता में सभी जिलों से करीब 2000 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता में देर शाम आयोजित 400 मीटर बाधा रेस (हर्डल) में स्टेडियम की खिलाड़ी निर्मल पुनिया प्रथम और रीतिका शर्मा ने दूसरा स्थान हासिल कर गांव का नाम रोशन किया है।
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छह बेटियों के पिता को खेल से खास लगाव
हिसार बरवाला खरक पुनिया गांव के राममेहर का खेलों से बहुत लगाव है। उनकी छह बेटियां हैं, उन्होंने कभी बेटियों को बेटों से कम नहीं समझा और बेटियों को रेस के मैदान में उतारा। उनकी बेटी रिंकू पुनिया 100 मीटर रेस में कई पदक अपने नाम कर चुकी है। इसके अलावा गांव की निर्मल पुनिया, रुकेश, निर्मल देवी, रोहित रानी, मधु आदि भी नेशनल स्तर पर गांव का नाम चमका चुकी हैं।
अभिभावक कोच की देते हैं सैलरी
गांव में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वाले कोच प्रदीप की सैलरी खिलाड़ियों के अभिभावक मिलकर देते हैं। वैसे तो कोच प्रदीप नाममात्र केवल पांच हजार रुपये ही लेते हैं। फिर भी ग्रामीण उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने देते। कोच का कहना है कि जब कोई खिलाड़ी उनके द्वारा लिये गये प्रशिक्षण के दम पर मेडल लेकर आता है तो गांव के साथ साथ जिले और प्रदेश का भी नाम रोशन होता है।
ट्रैक पर इनका दिया जाता है प्रशिक्षण
उन्होंने बताया कि ट्रैक पर सरपट रेस के अलावा 100, 400 मीटर बाधा दौड़, 5 हजार मीटर, ट्रिपल जंप, लांग जंप आदि की व्यवस्था की गई हैं। उन्होंने बताया कि अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को गांव की ओर से हर प्रकार की मदद दी जाती है।
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