संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। अभी तक स्कूलों की बसें बिना फिटनेस व पुलिस वेरिफिकेशन के सड़कों पर दौड़ रही थी। भविष्य में बिना मापदंडों के दौड़ती नजर आई तो कड़ी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में अब स्कूल बसों और वैन में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
दरअसल हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूलों को कड़े निर्देश दिए हैं कि बिना फिटनेस, कैमरे और पुलिस वेरिफिकेशन के कोई भी वाहन बच्चों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। वहीं निर्देशों में बसों की नियमित जांच, स्टाफ को ट्रेनिंग और बच्चों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने का भी आदेश दिया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
निर्देशों के बाद से आरटीए विभाग भी एक्शन मोड में आया गया। विभाग ने 10 से 12 स्कूलों की बसों की जांच की, तो काफी खामियां मिली। जिसमें कई बसों का रोड टैक्स या फिर अन्य दस्तावेज पूरे नहीं थे। ऐसे विभाग ने उनसे 40 से 50 हजार रुपये का जुर्माना कर लाखों रुपये रिकवर किए हैं। इसी तरह अगस्त माह में विभाग ने सवा 100 ओवरलोड वाहनों की जांच की जिनसे 85 लाख रुपये जुर्माने के तौर पर वसूल किए गए हैं।
ये मापदंड पूरे होना जरूरी
स्कूल बसों के लिए मापदंड में बस का पीला रंग, जीपीएस ट्रैकिंग, 50 किमी प्रतिघंटा की गति सीमा, खिड़कियों पर सुरक्षा ग्रिल, पर्याप्त आपातकालीन निकास द्वार, फायर एक्सटिंगुइशर, फर्स्ट-एड किट, और एक महिला अटेंडेंट की उपस्थिति शामिल है। इसके अलावा चालकों के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच साल का अनुभव और वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए, साथ ही बस का फिटनेस प्रमाणपत्र और बीमा भी अनिवार्य है। इसके अलावा हर वाहन की फिटनेस और नियमित सर्विसिंग, बस में सीसीटीवी कैमरा, फायर सेफ्टी उपकरण तथा बस स्टाफ को आपातकालीन हालात से निपटने का प्रशिक्षण होना अनिवार्य है।
हमने पिछले तीन माह से अभियान चलाकर स्कूलों की बसों पर शिकंजा कसा है। करीब 10 से 12 बसों पर कार्रवाई की है उनके रोड टैक्स, चालकों के लाइसेंस तक नहीं थे। इसके अलावा अन्य दस्तावेज पूरे न होने पर जुर्माना भी लगाया गया है। इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। -एस रेहडू, एटीओ, आरटीए यमुनानगर।