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Karnal News: हरियाली बढ़ेगी तो बचेगी सांसों की डोर

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- जिले की 38 फीसदी भूमि पर हरियाली जरूरी पर अभी तक है 27 प्रतिशत क्षेत्र
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विश्व पृथ्वी दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। वन विभाग के अनुसार जिले की 38 प्रतिशत भूमि पर हरियाली जरूरी है जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे, लेकिन अभी तक 27 प्रतिशत भाग ही हरा भरा है। हमें अभी 11 प्रतिशत भूभाग पर पौध रोपण करना होगा ताकि धरा हरी-भरी हो और लोगों को साफ व स्वच्छ वातावरण मिल सके। वन विभाग के साथ-साथ शहर में कुछ सामाजिक संस्थाएं ऐसी भी हैं जो धरती को हरा-भरा बनाए रखने के लिए कार्य कर रही हैं।
शहर की समर्पण मानव सेवा समिति अब तक लाखों पौधे लगा चुकी है। लोगों के घरों को भी हरा-भरा रखने के लिए भी समिति प्रयासरत है। 2016 में समिति की ओर से लोगों को निशुल्क पौधों की होम डिलीवरी देने की शुरुआत की गई। अब तक करीब 15477 पौधे लोगों को बांटे जा चुके हैं। इस वर्ष एक जून अब तक शहर में करीब 32 हजार पौधे रोपित किए हैं। इसके अतिरिक्त पानीपत, कुरुक्षेत्र सहित अन्य जिलों में भी समिति के पौधे लगाने का यह अभियान जारी है। वहीं पर्यावरण संरक्षण समिति से कंवल भासनी व एसके अरोड़ा भी इस दिशा में बेहतर कार्य कर रहे हैं।
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कुछ वर्षों से पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है इस कारण से धरती का तापमान बढ़ रहा है। पृथ्वी पर ग्लोबल वार्मिंग का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में मानव केयर संस्थान पर्यावरण को हरा भरा बनाए रखने के लिए 14 साल से प्रयास कर रहा है। संस्था की ओर से हर वर्ष पौधे लगाकर उनकी देखभाल की जाती है अभी तक संस्था की ओर से हजारों पेड़ लगाए जा चुके हैं। संस्था के अध्यक्ष संजय गुप्ता कहते हैं कि पीपल, बरगद एवं नीम खादी के पौधे अपने आप ही उगते रहते हैं अगर मनुष्य उन पौधों को सही जगह पर केवल स्थानांतरित भी कर दे तो प्रकृति को बचाया जा सकता है।

रसायनों के इस्तेमाल से भी भूमि की उर्वरा शक्ति हो रही खत्म
फसलों में अंधाधुंध रसायनों के प्रयोग से भी भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण होती जा रही है। किसान ज्यादा पैदावार के चक्कर में महंगे कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह न सिर्फ पृथ्वी बल्कि मानव के लिए भी हानिकारक है। वहीं धरा की हरियाली को कायम रखने के साथ-साथ जिले में गिरता भू जल स्तर भविष्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। यहां 90 प्रतिशत भूमिगत जल का इस्तेमाल किया जाता है, बाकी 10 प्रतिशत ही नहरों के पानी का सिंचाई में उपयोग होता है। इस कारण से भी भूमिगत जल का स्तर लगातार गिर रहा है। करनाल में 1974 से वर्ष दो हजार तक साढ़े तीन मीटर तक पानी नीचे गया। वर्ष दो हजार से अभी तक 16 से 17 मीटर तक पांच गुणा जल स्तर नीचे गया है। इसकी रोकथाम के लिए जल संचय में जनभागीदारी व जागरूकता जरूरी है।

वन विभाग का प्रयास
शहर में वन विभाग की ओर से प्राणवायु ऑक्सीजन की बढ़ोतरी के लिए सेक्टर-चार से मधुबन तक ऑक्सीवन पार्क तैयार किया जा रहा है। इस पार्क में कर्ण नगरी के लोग सैर और योग करते हैं। विभाग की ओर से यहां अंतरिक्ष व आरोग्य-वन भी तैयार किया गया है। इस ऑक्सीवन पार्क में करीब 30 किस्मों की अलग-अलग पौध से वन क्षेत्र विकसित किया गया है।
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वन विभाग की ओर से जिले में हरियाली को कायम रखने के लिए हर साल मानसून से पहले विभिन्न नर्सरियों में पौध तैयार करके सरकारी व सार्वजनिक स्थानों पर रोपित करवाई जा रही है। पिछले साल वन विभाग की ओर से 12 लाख पौध लगाई गई तो इस बार धरती हो हरा-भरा बनाने के लिए नौ लाख पौध तैयार की गई है।
- डॉ. पवन शर्मा, जिला वन अधिकारी
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