संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। करनाल क्लब में वॉइस ऑफ इंडिया की ओर से रविवार को सबरंग 2022 कार्यक्रम के तहत गीतों शाम की सजी। सुरों की इस महफिल में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने तराने गाए तो महफिल झूम उठी। जिसमें एसपी चौहान और मनिंद्र ने मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता, अगर तूफां नहीं आता, किनारा मिल गया होता... गीत गाया तो महफिल में तालियां गूंज उठीं।
बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सीएम प्रतिनिधि संजय बठला ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद एक के बाद एक गीतों की सुरलहरियां गूंजने लगीं। कैथल के विक्रांत कक्कड़ ने - दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा, बर्बादी की तरफ ऐसा मोड़ा गीत गाया। पानीपत की डा. शालिनी मेहता ने - ये समां समां है ये प्यार का, किसी के इंतजार का, दिल न चुरा ले कही मौसम बहार का, गाकर सभी को दातों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। निदेशक प्रो. कृष्ण अरोड़ा ने कहा कि वाइस आफ इंडिया के हर सदस्य का मकसद सभी को खुश रखना है। जीवन ही संगीत है और संगीत ही जीवन है। काम छोटा हो या बड़ा, बस नाम होना चाहिए। व्यक्ति जितनी ऊंचाई पर पहुंचता है, उतनी नम्रता आती है। अरोड़ा ने कहा कि अब तक 22 से ज्यादा रफी नाइट की जा चुकी है। ऊंचाई तक पहुंचने में वक्त लग जाता है, लेकिन वहां पहुंचने के बाद भी वक्त के साथ सभी को बदलना चाहिए।
एसपी चौहान ने कहा कि जीवन में संगीत बहुत जरूरी है। संगीत से जुडे़ लोग जिंदादिल होते हैं। अपनी एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी पत्नी सीमा चौहान के साथ गाड़ी में जा रहे थे, तभी उनका ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा हो गया। तब उन्होंने संगीत गुनगुनाया और अस्पताल तक पहुंच गया। अगर उस दिन संगीत न गुनगुनाता तो पता नहीं क्या होता। संगीत से जुड़ने से काम करने का जुनून भी बढ़ जाता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि संजय बठला ने कहा कि वॉइस ऑफ इंडिया के निदेशक प्रो. कृष्ण अरोड़ा ने कर्ण नगरी को जो पहचान दिलवाई है वो काबिले तारीफ है। करनाल जैसे शहर से जाकर मुुंबई में अपनी छाप छोड़ना बड़ी बात है, हमें अरोड़ा से सीख लेनी चाहिए। बात युवाओं की करें तो ठीक है, कृष्ण अरोड़ा ने तो उम्रदराज लोगों को भी गाने के लिए एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया इसके लिए उन्हें साधुवाद देता हूं।