- जिमखाना क्लब में साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं पेश कर लूटी वाहवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिमखाना क्लब में कारवाने-अदब (शायरों की अदबी संस्था) की महफिल सजी। इसमें साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं पेश कर खूब वाहवाही लूटी। डाॅ. एसके शर्मा ने कहा, मैंने तो चुप रहने की कसम खाई है, कर दिया खुद को खुदा के हवाले...।
कवि नरेश लाभ ने कहा, हर्षित है मधुबन की क्यारी...। अंजू शर्मा बोलीं, क्यूं सोचते हो तेरे नक्शे पर मिट जाएंगे, तेरी तदवीर का तो खुदा हाफिज है...। भारत भूषण वर्मा ने कहा, शिक्षा, सेना, पुलिस, खिलाड़ी, राजनेत्री व अधिकारी, चतुर्दिशा में होगी नारी शिक्षा के अनुप्राण से। कवि राजेंद्र शर्मा ने कहा, भोर भई पंछी चहके, जागो मां भारती के लाल जागो...।
कवि नरेंद्र कत्याल ने कहा, कुछ लोग हैं जिन्होंने वक्त के सांचे बदल दिए। कवि प्रेम पाल सागर ने कहा, मरने के बाद भी मेरा किरदार बोलेगा...। कवि हरबंस पथिक ने कहा, जो काबिले एतबार सब...। कवि कृष्ण कुमार ने कहा, गम का बादल जब छाया...। कवि गुलाब सिंह ने कहा वो भी आया दिल बहला कर चला गया...। डॉ. वनिता चोपड़ा ने कहा, मेरी हस्ती पे छाना चाहता है...। कवि जय भारद्वाज ने कहा, मुलतवी करके इशारा हम...। कवि जितेंद्र ने कहा, प्यार खोजने जो गया रूप पर्व के गांव...। कवि गुरुमुख सिंह ने कहा, मैं कुर्बानी वाला बकरा कौन सुने फरियाद मेरी...। ममता प्रवीण ने कहा... माना ये रंग इंद्रधनुषी, ए रंगरेज तेरे बनाए हुए हैं...।
महफिल के आगाज से पहले सभी ने राष्ट्रगान गाकर सुख-समृद्धि की कामना की। महफिल की अध्यक्षता कवि सिराज पैकर ने की। मंच संचालन कवि भारत भूषण वर्मा तथा रामेश्वर देव ने किया।