माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। साहित्यिक संस्था मन की उड़ान की ओर से आयोजित शाम- ए -गजल कार्यक्रम में कई गजलकारों व कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इसमें बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे शायर देवेंद्र नरवाल देव ने पाकिस्तान को कुछ यूं जवाब दिया- सिंदूर की कीमत समझा दी सिंदूर मिटाने वालों को, इससे बेहतर क्या सजदा हो उन जान गंवाने वालों को...।
एमडीडी बाल भवन में आयोजित कार्यक्रम साहित्यकार अंग्रेज सिंह की अध्यक्षता में हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में कवयित्री गुरविंदर कौर गुरी व नरेंद्र कत्याल मौजूद रहे। डॉ एसके शर्मा व डॉ आरबी कपूर भी सम्मानित अतिथियों में शामिल रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कुमारी खुशबू ने सरस्वती वंदना से की। अंग्रेज सिंह बोले- इतिहास दी तारीख याद रखनी चाई दी...। कवयित्री गुरविंदर कौर गुरी ने लोगों की टिप्पणियों पर कटाक्ष किया-मेरे चमन के लिए है सकूं की इल्तज़ा, जहर शब्दों में न घोला जाए...।
कवि नरेंद्र कत्याल ने कहा - फूल की पत्ती से कट सकता हीरे का ज़िगर...। शायर डॉ एसके शर्मा ने आपबीती बयां की-मैंने तो उम्र काटी है कांटों की राह में, कि मरने के बाद फूल मेरे नाम आ रहें हैं...। कवि डॉ आरबी कपूर ने अपना अनुभव साझा किया-इस रंग बदलती दुनिया के देखें हैं हमने रंग कई, जीवन के अथाह संघर्ष में यहां हैं हर रोज़ जंग नई...।,डॉ अंजू शर्मा ने कहा छल छल बहती जीवन धारा खोज रहा क्या ये जग सारा,ऐसी कोई खोज नहीं है ऐसी कोई मौज नहीं है जिसका नाम हो कोई किनारा...।
इसी शृंखला में कवयित्री पूनम गोयल, कवि प्रेम पाल सागर, शायर इक़बाल पानीपती, मंच संस्थापक रामेश्वर देव, शायर आशीष ताज, कवयित्री सुषमा चौपड़ा, शायर अशोक मलंग, कवयित्री प्रीति सिंह, डॉ श्याम प्रीति, अंकित सीकरी, गुरमुख सिंह वैडच, करनजीत सिंह मान, रमेश कुमार, मामचंद कुंजपुरा अशूंल राणा ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।