करनाल। धान की खेती में होने वाली पानी की अतिरिक्त खपत को कम करने के लिए हाईड्रोजेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा मूनटाइप विधि को अपनाते हुए बंजर जमीन को भी हरा करने के लिए प्रयास हो सकते हैं।
घटते जलस्तर और मरुस्थलीकरण पलवल और रेवाड़ी के विद्यार्थियों ने मॉडल प्रस्तुत किया है। वे करनाल के पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय पीजी कॉलेज में आयोजित प्रदेश स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में पहुंचे थे। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने करीब 20 दिन में मॉडल तैयार किया है।
इसके लिए खास तौर पर कृषि विशेषज्ञों की भी सलाह ली गई। दोनों ही विषयों से जुड़े विद्यार्थियों ने बताया कि कृषि क्षेत्र में दोनों ही समस्याएं बढ़ी हैं। इसलिए उन्होंने इस आइडिया पर काम किया। विदित हो कि हरियाणा में जलस्तर घट रहा है।
प्रदेश सरकार भी इसके लिए प्रयासरत है और कम जल खपत वाले खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा बंजर जमीन पर भी खेती करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा कई विद्यार्थियों ने एआई आधारित मॉडल भी प्रस्तुत किए और बरसाती मौसम में होने वाले जलभराव के समाधान के उपाय भी सुझाए।
हाइड्रोजेल : रेवाड़ी के कॉलेज की वर्षा और पारुल ने हाइड्रोजेल मॉडल तैयार किया है। इसमें दर्शाया कि हाइड्रोजेल का उपयोग कई तरह से किया जा सकता है जैसे सेनेटरी पैड में हाइड्रोजेल रक्त को जल्दी से सोखने का काम करता है।
वैसे ही खेती के क्षेत्र में इसके उपयोग से पानी की काफी बचत की जा सकती है। इसमें यह बीजों को जल्द अंकुरित करने में मदद करेगा और फलों व सब्जियों को अधिक समय तक स्टोर भी रखा जा सकता है। वहीं कैंसर में कीमोथैरेपी करने पर यह केवल कीमो वाले सेल्स पर ही काम करेगा, जिसमें यह शरीर के सभी हिस्सों को कीमो के दुष्प्रभाव से बचाने में मदद करेगा।
मरुस्थलीकरण :जीसीजी पलवल की छात्रा मृदुला और वंशिका ने ग्लोबल समस्या पर मॉडल तैयार किया। उन्होंने दर्शाया कि बंजर व सूखी भूमि में विभागों में विभाजित करना होगा।
इसमें जमीन की मिट्टी को मूनटाइप विधि से खेती योग्य तैयार किया जा सकता है। इस विधि में विशेष तरह से बारिश के पानी को जमीन में भेजा जाता है। इसके बाद पानी में जाने के बाद बंजर भूमि हरा होना शुरू हो जाएगी। उन्होंने मरुस्थली मिट्टी पर घास उगाते हुए इस तरह का मॉडल प्रस्तुत किया है। हालांकि इसके लिए वे अभी विशेषज्ञों से भी सलाह ले रहे हैं। संवाद