सौहार्द और आपसी भाईचारे को भूलता जा रहा मानव : कात्यायनी भारती
- फोटो : सौहार्द और आपसी भाईचारे को भूलता जा रहा मानव : कात्यायनी भारती
- दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित किया गया संकीर्तन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्री शिव चित्र गुप्त मंदिर सदर बाजार में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से संकीर्तन का आयोजन किया गया। जिसमें साध्वी कात्यायनी भारती ने कहा कि समाज की आधारभूत इकाई को इन्सान आज एकता, सौहार्द और आपसी भाईचारे के महत्व को भूला बैठा है। ईर्ष्या, घृणा जैसी कुत्सित भावनाओं का सर्वत्र बोलबाला है। ऐसे में स्वस्थ समाज की कल्पना करना कठिन प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इस सत्य को भी अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि वर्तमान सामाजिक विकृतियों के जिम्मेदार हम स्वयं हैं। ये घृणात्मक परिस्थितियां हमारी अवैज्ञानिक व संकुचित विचारधारा के ही परिणाम हैं। उदाहरण के तौर पर जब एक त्रिशंकू में से सफेद प्रकाश की किरणों गुजरती हैं तो सात विभिन्न रंग दिखाई देते हैं एक साधारण मनुष्य अल्पज्ञता के कारण इन सात रंगों को भिन्न स्रोतों से उत्पन्न मानता है परंतु एक वैज्ञानिक जानता है यह विभिन्न रंगों की किरणें सफेद प्रकाश का ही विघटित स्वरूप मात्र है।
दृष्टिकोण का यही अंतर एक साधारण इन्सान व ब्रह्माज्ञान प्राप्त साधक के बीच की व्याप्त होता है। साध्वी ने कहा कि साधारण मनुष्य के लिए यह सारा संसार भिन्न-भिन्न भाषा, भूषा, रूप रंग व संप्रदायों वाले जीवों का गृहस्थान है, परंतु एक ज्ञानी भक्त इन विभिन्नताओं में भी अभिन्नता का अनुभव करता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी का भी यही कहना था कि दुर्जन के लिए संसार नरक स्वरूप है। इसके विपरीत एक सज्जन के लिए यह स्वर्ग सदृश ही है। इससे भी विराट दृष्टिकोण ज्ञानी भक्त का होता है। जिसके लिए यह संसार साक्षात ईश्वर का प्रतिरूप बन जाता हैं। नामदेव, चैतन्य, मीरा, प्रहलाद, जैसे महान भक्तों ने भी हर कण, हर काया में श्री भगवान के दर्शन किए थे।