संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शहर के जिला नागरिक अस्पताल में 20 बेड का एक नशा मुक्ति केंद्र है। यहां अलग-अलग नशा करने वाले मरीज अपना इलाज कराने के लिए आते हैं लेकिन पिछले एक महीने से नशा मुक्ति केंद्र में मनोरोग विशेषज्ञ नहीं है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता मरीजों का इलाज करते थे। वह नौकरी छोड़कर जा चुके है। अब नशे के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ गई है।
हर रोज मनोरोग ओपीडी में 50 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते थे, जो नशा छोड़ना चाहते हैं अब उन मरीजों को चिंता है कि उनका इलाज कौन करेगा। हर रोज मरीज इलाज के लिए जिला नागरिक अस्पताल में आते है लेकिन वहां डॉक्टर न मिलने पर वह वापस चले जाते है। नशा मुक्ति केंद्र में महिला, पुरुष व बच्चों के लिए तीन वार्ड हैं। जहां मरीजों को दाखिल किया जाता है। जिनका इलाज निशुल्क होता है और दवाइयां भी निशुल्क दी जाती है। खाने की भी व्यवस्था है। जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग ओपीडी सबसे अधिक मरीज शराब पीने वाले मरीज आते हैं।
कुछ मरीज खुद डॉक्टर के पास आते हैं तो कुछ मरीजों को उनके परिजन इसके बाद बीड़ी सिगरेट पीने वाले आते हैं तो तीसरे नंबर पर वह लोग आते हैं जो गांजा, चरस पीते हैं। इसी प्रकार स्मैक व चिट्टे का नशा करने वाले मरीज आ रहे हैं। जो नशे को छोड़ना चाहते हैं। काफी लोगों ने इलाज के बाद नशा छोड़ा भी है।
नशा मुक्ति केंद्र में ये हैं सुविधाएं
नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों के लिए मिनी जिम, म्यूजिक के लिए गिटार, टीवी, कैरम बोर्ड, शतरंज उपलब्ध हैं। इसके अलाना नशा मुक्ति केंद्र में अलग से एक योग कक्ष बनाया हुआ है। इसके लिए एक योग इंस्ट्रक्टर है। जो मरीजों को योग सिखाती है ताकि मरीज हर रोज योग कर सके।