संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जीवनशैली में बदलाव और तनाव के असर से महिलाओं में हार्मोन का असंतुलन हो रहा है। इससे कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं। एक बड़ी समस्या रजोनिवृत्ति की आयु का बढ़ जाना है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति की औसत उम्र 45 से 48 वर्ष के बीच होती थी। अब यह उम्र बढ़कर 50 से 55 वर्ष तक पहुंच गई है। जिला नागरिक अस्पताल की स्त्री रोग ओपीडी में रोजाना ऐसी 15 से 20 महिलाएं पहुंच रही हैं।
जिला नागरिक अस्पताल से स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजु ने बताया कि इसके पीछे मुख्य कारण कैल्शियम और व्यायाम की कमी है। डॉ. अंजू गर्ग का कहना है कि अत्यधिक मानसिक तनाव, देर रात तक जागने, काम के दबाव और खानपान में पौष्टिकता की कमी के कारण समस्या आ रही है। इससे महिलाओं में कमजोरी के साथ हृदय, हड्डियों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। डॉ. गर्ग कहती हैं कि रजोनिवृत्ति में देरी से एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर असंतुलित रहता है, जिससे हृदय रोग, हड्डियों की कमजोरी (ऑस्टियोपोरोसिस) और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. गर्ग का कहना है कि महिलाओं में नियमित स्वास्थ्य जांच की आदत बहुत कम है। बहुत सी महिलाएं लक्षणों को नजरअंदाज करती हैं या शर्म के कारण डॉक्टर से परामर्श नहीं लेतीं। उन्होंने कहा कि अगर महिलाएं समय-समय पर जांच करवाएं, तो हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी कई समस्याओं को समय रहते रोका जा सकता है।
व्यायाम जरूर करें
डॉ. अंजू गर्ग ने महिलाओं को सलाह दी कि वे कैल्शियम और आयरन युक्त संतुलित आहार लें, पर्याप्त नींद और व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। उन्होंने कहा कि रक्त संचार को बढ़ाने वाले व्यायाम जैसे तेज चलना, योग और मेडिटेशन हार्मोनल स्वास्थ्य को संतुलित रखते हैं और तनाव को कम करते हैं। महिलाओं को अपने शरीर में हो रहे परिवर्तनों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और 40 की उम्र के बाद नियमित रूप से हार्मोन, बोन डेंसिटी और हृदय जांच करवानी चाहिए। डॉ. अंजू ने कहा कि रजोनिवृत्ति जीवन का एक स्वाभाविक चरण है, पर अगर हम इसे अनदेखा करेंगे तो यह बीमारियों की शुरुआत बन सकता है।
- ये करें
बेहतर नींद
वजन घटाएं
रक्तचाप का ध्यान रखें
बीन्स, फलियां और सोयाबीन लें
- ये हैं लक्षण
चिड़चिड़ापन
नींद न आना
वजन बढ़ना
अधिक थकान