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Karnal News: जीवनशैली से हार्मोन असंतुलित, लड़कियों का घटा कद

Tue, 14 Oct 2025 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जीवनशैली में बदलाव बच्चों पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। खासकर लड़कियों पर। बिगड़ा खानपान, शेंपू, मेकअप, परफ्यूम आदि के इस्तेमाल से बच्चियों में असमय यौवनावस्था की समस्या बढ़ गई है। हार्मोन असंतुलन से कम उम्र में मासिक धर्म की प्रक्रिया शुरू होने से उनकी लंबाई नहीं बढ़ रही। अन्य शारीरिक और मानसिक समस्याएं भी आ रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल में हर सप्ताह तीन से चार बच्चियां 10 साल से कम उम्र में ही मासिक धर्म (असमय यौवनावस्था) की परेशानी को लेकर पहुंच रही हैं।सीनियर मेडिकल अधिकारी डाॅ. अंजू गर्ग ने बताया कि पहले जहां किशोरियों में 13 से 15 साल की उम्र के बीच मासिक धर्म शुरू होता था वहीं अब 8 से 10 साल की बच्चियों में यह शुरू हो रहा है। पिछले सप्ताह की ओपीडी में ही तीन बच्चियां इस समस्या की लाई गईं। इस स्थिति को असमय याैवानावस्था कहा जाता है। यह तब शुरू होती है जब शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है।


अधिक रक्तस्राव से रुक रहा हड्डियों का विकास
स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. वैशाली ने बताया कि कम उम्र में और समय से पहले मासिक धर्म से मानसिक समस्याएं भी आ रही हैं। अधिक रक्तस्त्राव होता है तो हड्डियों पर गहरा असर पड़ता है। लंबाई बढ़ना पूरी तरह से रुक जाती है। यह समस्या आमतौर पर 30 प्रतिशत छोटी बच्चियों में देखी जा रही हैं। जरूरी है कि माता-पिता बच्चियों की सेहत पर ध्यान दें। जल्द मासिक धर्म होने पर तुरंत चिकित्सक दिखाएं। बच्चियों का शारीरिक विकास तो तेज हो रहा है लेकिन मानसिक और हड्डियों का विकास उतनी तेजी से नहीं हो रहा है। इससे थाॅयराइड और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
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परफ्यूम और मेकअप से बच्चों को रखें दूर
डाॅ. वैशाली ने बताया कि आजकल सोशल मीडिया से प्रभावित होकर छोटी उम्र की लड़कियां भी केमिकल युक्त परफ्यूम, नेल पेंट और मेकअप का प्रयोग कर रही हैं। इनमें हानिकारक रासायनिक तत्व हार्मोन के स्राव को प्रभावित करते हैं। इससे भी कम उम्र में मासिक धर्म की समस्या होती है। बच्चों को परफ्यूम, मेकअप से दूर रखना चाहिए।

-चिकित्सक की सलाह
जंक फूड, पैक्ड फूड और सॉफ्ट ड्रिंक से दूरी बनाएं।
फल, हरी सब्जियां और प्रोटीन युक्त आहार लें।
खाने-पीने की सामग्री प्लास्टिक कंटेनर या बोतलों में न रखें।
माइक्रोवेब में प्लास्टिक के बर्तन न गरम करें।
रोजाना कम से कम 30 मिनट का व्यायाम करें।
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