संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का दो महीने से मानदेय अटका है। जिले में 50 से अधिक कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इन कर्मचारियों ने कई बार धरना देकर व सिविल सर्जन को लिखित शिकायतें देकर समस्या का समाधान मांगा, लेकिन स्थिति जस की तस बनी है। सबसे ज्यादा परेशानी स्टाफ नर्स वर्ग को है, जिन्हें कई महीने से मानदेय नहीं मिला है फिर भी ड्यूटी दे रही हैं ताकि कम से कम नौकरी बनी रहे।
कर्मचारियों का कहना है कि उनका कोई दूसरा रोजगार नहीं है, ऐसे में मजबूरी में बिना वेतन के काम करना पड़ रहा है। इस संबंध में सिविल सर्जन पूनम चौधरी से बात की गई तो उनका कहना था कि राज्य सरकार का एक माह का रुका हुआ हिस्सा मिल चुका है। बाकी भुगतान प्रक्रिया में है। वहीं नौकरी की सुरक्षा (जॉब सिक्योरिटी) पर उन्होंने साफ कहा कि इस बारे में उन्हें अभी कोई जानकारी नहीं है। हालांकि पहले कर्मचारियों का मई और जून का मानदेय अटका हुआ था जो जारी कर दिया गया था लेकिन अब जून और जुलाई तक का मानदेय अटका पड़ा है जिस कारण कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई बार हड़ताल कर चुके हैं सिविल सर्जन कार्यालय पर जाकर भी अन्य जगहों पर भी लेकिन हर जगह से हवाला देकर वापिस लौटा दिया जाता है। इस बार कर्मियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को तेज करने पर मजबूर होंगे।
10 लैब टैक्नीशियन
जिला नागरिक अस्पताल में एनएचएम आउटसोर्सिंग के तहत करीब 10 लैब टेक्निशियन, 15 कंप्यूटर ऑपरेटर, 30 ड्राइवर और 20 के करीब स्टाफ 2019 से भर्ती हैं। साथ ही कई सफाई कर्मी और कुक भी शामिल हैं। इसके अलावा 100 के करीब स्टाफ नर्स हैं।