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साइट विजिट कुछ नहीं, इसके नाम पर बीवियों को कराते हैं शॉपिंग

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अपने तल्ख अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले मंत्री अनिल विज करनाल में भी अपने अंदाज में नजर आये। चार अधिकारियों समेत कुल पांच को उन्होंने करनाल नगर निगम में छापे के दौरान सस्पेंड कर दिया। डिस्पैच रूम से शुरू होकर मंत्री एमई, एक्सईएन सहित डीटीपी समेत कुल 7 कमरों में गये। हर जगह उन्होंने रखी फाइलों की छानबीन की। साथ के साथ किस फाइल पर कितना काम हुआ, इसका जवाब भी उन्होंने मांगा। तल्ख अंदाज में मंत्री के सवालों ने अधिकारियों के पसीने छुटा दिये। एक्सईएन एलसी चौहान के कमरे में खाली कुर्सी और क्लर्क के तर्क पर मंत्री भड़क गये। बोले, साइट विजिट कुछ नहीं इसके नाम पर तो ये बीवियों को शॉपिंग कराते हैं। कहां हैं ये बुलाओ इन्हें। जानिये किस कमरे में किस अंदाज में मंत्री ने बात की, अमर उजाला संवाददाता की इस रिपोर्ट में-
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डिस्पैच रूम
आपने क्या तमाशा बना रखा है ये, हू आर यू टू चैक
बरामदे में खड़े लोगों से बातचीत करने के बाद मंत्री विज सीधा सबसे पहले डिस्पैच रूम में पहुंचे। यहां उन्होंने शिकायतों को पढ़ा। कई शिकायतें नवंबर माह की भी रखी हुई मिली। इस पर उन्होंने कर्मचारियों से जवाब मांगा, तो वे कोई जवाब नहीं दे पाये। बोले, आपका काम है डाक को रिसीव करना, क्यों लोगों को परेशान करते हो। क्लर्क हो ना.. आपने क्या तमाशा बना रखा है ये, लोग परेशान हो रहे हैं। इस पर कर्मचारी बोले, सर हम चैक करते हैं तो गुस्साये मंत्री ने पूछा- हू आर यू टू चैक..। कितनी शिकायतें तो तुम्हारे कारण यहीं पड़ी रह जाती हैं।
कमरा-2
मैं अंगूठा टेक मंत्री नहीं हूं, पढ़ा लिखा हूं बरगला मत..
डिस्पैच रूम के बाद मंत्री सीधा एमई लख्मी चंद के रूम में पहुंचे। कमरा नंबर-2 में भी उन्होंने फाइलों की जांच की, कई फाइलों के बारे में मंत्री ने एमई से पूछा, तो हर बार उन्होंने मंत्री को कारण बता कर टाल दिया। फिर वसंत विहार की शिकायत उनके हाथ लग गई। अंग्रेजी में पढ़ते हुये उन्होंने इसके काम के बारे में पूछा तो एमई ने फिर तर्क देना शुरू कर दिया। तो छूटते ही मंत्री बोले, मैं कोई अंगूठा टेक मंत्री नहीं हूं, पढ़ा लिख हूं बरगला मत.. मुझे, मैं सुनने नहीं आया, तुम्हारे काम देखने आया हूं। फिर उन्होंने शिकायत पढ़ते हुये एलीवेशन ऑफ रोड अबॉव माई हाउस इन बसंत विहार गली नंबर-3. का मतलब और ये काम कब कराया किस दिन कराया इसके बारे में एमई लख्मी चंद राघव से पूछा।
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कमरा-3
भाई मेरे को काम चाहिये, तूने क्या किया ये बता..
कमरा नंबर-3 है एक्सईएन सतीश शर्मा का। यहां भी मंत्री ने विजिट किया। आते ही फाइलों को खोलना शुरू कर दिया। एक के बाद एक कई फाइलें उन्होंने निकाली। एक फाइल में उन्होंने कहा कि कंपनी ने काम 90 दिनों में पूरा करना था, लेकिन नौ माह बीत गये। इस फाइल में लिखा था कि 90 दिन में काम पूरा नहीं हुआ तो कार्रवाई होगी। लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हुआ। तुमने छह माह और दे दिये। किस लिये कंपनी को अतिरिक्त समय दिया? इस पर सख्त लहजे में एक्सईएन से मंत्री बोले भाई मेरे को काम चाहिये, तुने क्या किया ये बता..। छह महीने भी निकल गये, 90 दिन भी निकल गये। इतनी कृपा कंपनी पर क्यों हुई इस पर उन्होंने एक्सईएन से स्पष्टीकरण मांग लिया।
कमरा-7
डीसी क्या, जिसको मर्जी उठाकर बुला लेता है..
कमरा नंबर-4 के बाद 7 में भी जाते ही मंत्री बोले- ये भी गायब है, जब मैं यहां पर आया तो ये कहां है। इस पर क्लर्क अंदर आ गया। पूछा साहब कहां हैं। तो जवाब दिया कि एक्सईएन एलसी चौहान डीसी की मीटिंग में गये हैं। किसे बताकर? इस पर क्लर्क कोई जवाब नहीं दे पाया, तो मंत्री बोले, डीसी क्या जिसको मर्जी उठाकर बुला लेता है। जाने से पहले एक्सईएन ने मेयर या आयुक्त से परमिशन तो ली होगी? या फिर कहीं रजिस्टर में नोट किया है? नहीं किया ना..। साइट विजिट पर जाते हैं ये कह कर अपनी बीवी को शॉपिंग कराते हैं ये। कोई अपनी डायरी मैंटेन नहीं की।
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