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Karnal News: पंजीकरण में देरी पर हाईकोर्ट ने लगाई करनाल प्रशासन को फटकार

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। बैंक नीलामी में बेची गई संपत्ति के पंजीकरण में अनुचित देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने करनाल प्रशासन को जमकर फटकार लगाई है। अदालत ने निगधू के उप-पंजीयक को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर खरीदार के नाम बिक्री विलेख का पंजीकरण पूरा करे।



मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायाधीश संजीव बेरी की खंडपीठ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। एसबीआई ने बताया कि डिफॉल्टर से 6.38 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली इसलिए अटक गई क्योंकि उप-पंजीयक ने नीलामी खरीदार महादेव फूड्स के पक्ष में दस्तावेज़ दर्ज करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने इस देरी को “अनुचित और गैर-कानूनी” मानते हुए हरियाणा सरकार पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें से 10,000 रुपये एसबीआई को और 15,000 रुपये पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को दिए जाएंगे।
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अदालत ने रिकॉर्ड से पाया कि ऋणी महावीर सीरियल्स ने वर्ष 2013 में 8.10 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, जिसे वह वापस नहीं कर पाया। इसके बाद एसबीआई ने एसएआरएफएईएसआई कानून के तहत कार्रवाई करते हुए 21 सितंबर 2021 को गिरवी संपत्ति की नीलामी की। खरीदार ने 7.38 करोड़ रुपये की पूरी राशि जमा की और 29 सितंबर 2021 को बैंक ने बिक्री प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया। इसके बावजूद उप-पंजीयक ने वर्ष 2018 की एक राजस्व प्रविष्टि का हवाला देते हुए विलेख दर्ज करने से इनकार कर दिया, जिसमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की कर बकाया की मांग दर्ज थी। अदालत ने इस आधार को निरस्त करते हुए कहा कि बैंक का 2013 का बंधक राज्य की 2018 की कुर्की से पहले का है, इसलिए बाद की प्रविष्टि बैंक के वैध अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रपट प्रविष्टि केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड है, यह किसी के अधिकार तय नहीं करती।
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