संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। समाज में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद जिले में बाल विवाह नहीं रुक रहे हैं। बाल विवाह निवारण अधिकारी के कार्यालय में हर महीने औसतन सात से आठ मामले दर्ज हो रहे हैं। इस वर्ष कुल 86 बाल विवाह के मामले दर्ज किए गए। वहीं, सोमवार को इंद्री के गांव घिसरपड़ी गांव से बाल विवाह का मामला दर्ज किया गया, जिसमें बाल विवाह निषेध अधिकारी की टीम ने मौके पर जाकर शादी रुकवाई और बरात को वापस भेज मामला दर्ज किया।
बाल विवाह निषेध अधिकारी सविता राणा ने बताया कि जिले में बाल विवाह को रोकने के लिए 100 दिनों का अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें गांव के सरपंच, पंच सदस्यों, ग्रामीणों, बैंकेट हॉल संचालकों और पंडितों को जागरूक किया जा रहा है। टीम बाल विवाह पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक टीम सख्ती के साथ जांच कर रही है। बाल विवाह निवारण अधिकारी ने कहा यदि कोई भी आयोजन बिना उम्र सत्यापन के किया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समाज की मदद से ही इस समस्या का समाधान संभव है।
- 22 नवंबर को रामनगर में रुकवाया बाल विवाह
22 नवंबर को रामनगर में बाल विवाह की सूचना मिलने के बाद टीम पहुंची। इसमें 16 साल की नाबालिग लड़की की 24 वर्षीय लड़के से शादी करवाई जा रही थी। टीम को पता चलता है कि परिवार लड़की की शादी किसी कारण से जल्दी करवा रहे थे, जिसमें मौके पर जाकर टीम ने मामला दर्ज किया और शादी रुकवाई।
इस वर्ष दर्ज किए गए बाल विवाह मामले
माह दर्ज हुए मामले
जनवरी 13
फरवरी 6
मार्च 11
अप्रैल 8
मई 9
जून 6
जुलाई 6
अगस्त 4
सितंबर 9
अक्तूबर 6
नवंबर 8