उम्दा चावल के लिए विख्यात हैफेड अब मार्केट में आटा उतारने की तैयारी में है। इसके लिए तरावडी में आधुनिक तकनीक की मशीन स्थापित की गई है।
मशीन पर करीब तीन करोड़ रुपये की लागत आई है। कूल प्रोसेसिंग वाली इस मशीन के जरिये हैफेड देसी गेहूं का आटा मार्केट में उतारेगी। इसके अलावा मैदा और दलिया का भी उत्पादन किया जाएगा।
इसके लिए हैफेड ने ट्राइसिटी (चंडीगढ, पंचकूला, मोहाली) तथा दिल्ली की मार्केट को टारगेट किया है। सोमवार को यहां धान खरीद की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे हैफेड के एमडी अशोक यादव ने बताया कि मार्केट में आटा और दलिया की गुणवत्ता के बारे में लोगों में कई तरह के सवाल हैं।
ऐसे में हैफेड ने तय किया है कि वह लोगों को देसी गेहूं से निर्मित आटा उपलब्ध करवाएगी। इसमें सामान्य गेहूं का आटा और दलिया भी रहेगा। हालांकि हैफेड की प्राथमिकता देशी गेहूं की ही होगी। इसके लिए तरावडी स्थिति हैफेड के प्लांट में तीन करोड़ रुपये की लागत से मशीन लगाई गई है।
इस मशीन का ट्रायल हो चुका है और आटे की पैकिंग का काम चल रहा है। जल्द ही यह आटा हैफेड के आउटलेट्स पर मिलना शुरू हो जाएगा। हैफेड इसके लिए देसी गेहूं की खरीद कांटेक्ट फार्मिंग के जरिये करेगा।
एमडी यादव ने बताया कि यह मशीन धीमी गति से गेहूं की पिसाई करेगी, ताकि आटे की गुणवत्ता प्रभावित न हो। यह उत्पाद पूरे प्रदेश में हैफेड आउटलेट्स पर होगा।
किसान को हाथोंहाथ गन्ने का भुगतान
अशोक यादव ने सोमवार को एक बड़ी घोषणा की। इस घोषणा के तहत प्रदेश में एकमात्र हैफेड शुगर मिल किसानों को हाथोंहाथ गन्ने का भुगतान करेगा। इसके लिए विभाग ने सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
उन्होंने बताया कि जैसे ही किसान गन्ना लेकर असंध स्थित हैफेड के मिल में पहुंचेगा और गन्ने का तौल होगा। इसके तुरंत बाद किसान के खाते में उसका गन्ना भार दर्ज होते ही नकद भुगतान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। ऐसे में किसानों को पैसे के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि हैफेड देश की पहली ऐसी एजेंसी है, जो किसान को उसकी फसल का हाथोंहाथ दाम देगी।