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हीमोफीलिया का इंजेक्शन नहीं, मरीज परेशान

Fri, 27 Nov 2015 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पिछले कई महीनों से हीमोफीलिया का इंजेक्शन न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वेयर हाउस में हीमोफीलिया के इंजेक्शन का स्टॉक है। वेयर हाउस से इंजेक्शन कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज को नहीं दिए जा रहे। क्योंकि मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत नहीं आता। तब से मेडिकल कॉलेज बना है तबसे अस्पताल भी मेडिकल कॉलेज के अंडर आता है।
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वेयर हाउस द्वारा ये टीके स्वास्थ्य विभाग को दिए जा सकते हैं। फिर स्वास्थ्य विभाग टीके मेडिकल कॉलेज को भेज सकता है। इस प्रकार दोनों विभागों की कसाकसी में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वीरवार को तो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नोटिस भी लगा दिए गए कि हीमोफीलिया के इंजेक्शन के लिए सिविल सर्जन से मिलें। पिपली निवासी विजय गर्ग का कहना है कि कई बार कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में जा चुके है। लेकिन डॉक्टर बोलता है कि अस्पताल में इंजेक्शन नहीं है।

बाहर से इंजेक्शन लगवाना बहुत मंहगा पड़ता है। प्राइवेट दुकान से इस इंजेक्शन की कीमत 1700-1800 के लगभग है। जबकि सरकारी अस्पतालों मेे ये इंजेक्शन मुफ्त लगाए जाते है। जिला में हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों की संख्या 30 के लगभग है।
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क्या है हीमोफीलिया
हीमोफीलिया एक जन्मजात विकार है। जो व्यक्ति हीमोफीलिया से पीड़ित होता है उसे अगर चोट लग जाए तो रक्तस्राव नहीं रूकता। इसलिए मरीज को हीमोफीलिया के इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। यह रोग बहुत कम लोगों को होता है। हीमोफीलिया से पीड़ित मरीज को कम से कम माह में एक बार हीमोफीलिया के टीके की जरूरत पड़ती है। शरीर में कोई भी चोट लगने पर पीड़ित मरीज को हीमोफीलिया का इंजेक्शन लगे बिना रक्तस्राव नहीं रूकता।

दूसरे जिले में नही लग रहे इंजेक्शन
पहले मरीज हीमोफीलिया के इंजेक्शन दूसरों जिलों से लगवा लेतेे थे। लेकिन अब इंजेक्शन केवल उसी जिला में लगाए जाते है। जहां का मरीज निवासी है। पहले करनाल जिला के मरीज कुरुक्षेत्र या अंबाला जिला में ये इंजेक्शन लगवा लेते थे। लेकिन अब वहां भी मरीजों को बोला जाता है कि आपको करनाल जिला में ही इंजेक्शन लगेगा।

वर्जन
हीमोफीलिया के इंजेक्शन स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत है। इसलिए इस इंजेक्शन को लेने के लिए मरीजों को सिविल सर्जन से मिलना होगा। मेडिकल कॉलेज में इंजेक्शन नहीं है। मरीज परेशान हैं।
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-योगेश शर्मा, उपचिकित्सा अधिकारी, मेडिकल कॉलेज करनाल।
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