प्रदेश सरकार ने पेंशन की राशि तो बढ़ा दी लेकिन उसको बांटने की व्यवस्था अभी भी सुचारू नहीं हो पाई है। जिला समाज कल्याण विभाग में पेंशन के लिए घमासान मचा हुआ है। करीब 51 हजार बुजुर्ग पेंशन की इंतजार में हैं। इनमें से 46 हजार बुजुर्गों के पेंशन की जांच ढाई साल से चल रही है, जिसमें से अब 1500 बुजुर्गों को पेंशन देनी शुरू हुई है। इसके अलावा फरवरी से नवंबर तक के नये 6500 फार्म जमा हैं।
इनको कंप्यूटर में अपलोड करके इनकी जांच होगी और इसके बाद नये पेेंशन धारकों को पेंशन मिलनी शुरू होगी। स्टाफ की संख्या कम होने के कारण बुजुर्गों को पेंशन के लिए और इंतजार करना होगा। दिनभर विभाग के कार्यालय में बुजुर्ग पेंशन जारी करवाने के लिए धक्के खा रहे हैं। प्रशासन की इस व्यवस्था को बुजुर्ग कोसते हुए कार्यालय से निकलते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि प्रशासन अनदेखी कर रहा है और सरकार को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। जिले में साढ़े छह करोड़ रुपये के पेंशन घोटाले की जांच चल रही है।
इनमें कम उम्र के लोगों ने बुजुर्ग बनकर पेंशन जुड़वा ली। ऐसे फर्जी पेंशन बंधने से विभाग ने जांच करवाई तो इसमें 35 से 58 साल के बीच के लोगों को 60 साल से ऊपर दिखाकर पेंशन जारी कर दी। जांच में क्लीयर हुआ कि स्थानीय अधिकारियों ने मिलीभगत करके कम उम्र के लोगों की पेंशन बनवाने में उनके फोटोकॉपी दस्तावेजों में छेड़छाड़ करके इनकी उम्र पूरी कर दी।
जांच में गड़बड़ी पर रोकी पेंशन
जांच में गड़बड़ पकड़े जाने के बाद तुरंत प्रभाव से दो साल बनी पेंशनों को रोककर इनकी जांच शुरू कर दी। इससे 46 हजार बुजुर्गों की पेंशन रुकते ही उनकी टेंशन बढ़ गई है। ढाई साल से बुजुर्ग पेंशन लेने के लिए दस्तावेज जमा करवा चुके हैं, लेकिन इनको पेंशन कब तक मिलेगी कोई जानकारी नहीं है। 46 हजार रोकी गई पेंशन धारकों की जांच चंडीगढ़ में चल रही है। इनमें 1500 पेंशन जारी करने की लिस्ट मुख्यालय से आ गई है। अब 44 हजार 500 बुजुर्गों की पेंडिंग हैं। इसके अलावा नई पेंशन के लिए भी बुजुर्गों के करीब 6500 फार्म जमा है।
इन फार्मों को कंप्यूटर पर अपलोड नहीं किया है। जब तक कंप्यूटर पर अपलोड नहीं होते तब तक इनकी पेंशन नहीं बन सकती। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अभी तक जनवरी 2015 के फार्म कंप्यूटर में दर्ज हुए हैं। फरवरी से 25 नवंबर तक के करीब 6500 फार्म पेंडिंग हैं। इन फार्मों को कंप्यूटर में अपलोड करने के बाद इनके कागजों की जांच होगी। दस्तावेज सही मिलने के बाद इनकी पेंशन जारी होगी।
स्टाफ न होने से बढ़ी परेशानी
विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि स्टाफ बिल्कुल नहीं है। कर्मचारी है नहीं और काम बढ़ता जा रहा है। यदि स्टाफ पूरा हो जाए तो बुजुर्गों का काम पेंडिंग नहीं रह सकता। प्रदेशभर में विभाग का पूरा स्टाफ है, लेकिन सीएम सिटी में चार में से दो असिस्टेंट व छह क्लर्कों के पद खाली हैं। ऐसे में क्लर्क से लेकर प्रत्येक काम का बोझ दो असिस्टेंट के ऊपर है। ऐसे में इनको कोई जरूरी काम हो जाता है तो पूरे दिन विभाग का एक भी कागजात आगे नहीं बढ़ पाता। इसलिए विभाग में हर वक्त समस्या लेकर आने वाले बुजुर्गों का जमघट लगा रहता है।
वर्जन
स्टाफ की संख्या कम होने के कारण कार्य की गति धीमी है। 46000 पेंशन धारकों की जांच में से 1500 की पेंशन जारी कर दी है। पेंशन घोटाले के चलते इनकी जांच चल रही है। जैसे-जैसे नये फार्म कंप्यूटर में अपलोड हो रहे हैं इनकी जांच कर रहे हैं। स्टाफ कम होने से विभाग से लोगों की परेशानी बढ़ी है, इसको हम समझते हैं। जो व्यवस्था है उसके मुताबिक बेहतर कार्य करने में लगे हुए हैं।
- ओमप्रकाश, जिला समाज कल्याण अधिकारी करनाल।