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सरकारी रेट 1835, खरीदा जा रहा 1700 के भाव

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करनाल अनाज मंडी में धान में नमी के नाम पर किसानों के साथ ठगी का खेल जोरों पर चल रहा है। पीआर धान का सरकारी रेट 1835 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन किसानों से वह धान में नमी बताकर 1700 के आसपास के रेट में खरीदी जा रही है। इसके अलावा जे फार्म भी सरकारी रेट का काटा जा रहा है। इतना ही एजेंसी के कर्मचारी बिना मशीन के धान में नमी का अनुमान लगा रहे हैं। किसानों के साथ ठगी कर रहे हैं। मंडी में चल रहे इस खेल के बारे में मार्केट कमेटी के अधिकारियों से अन्य कर्मचारियों को भी पता है इतना ही नहीं आढ़ती भी इस बारे में सब जानते हैं लेकिन बोलने और कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है। वहीं दूसरी और अनाज मंडी में किसानों के लिए कोई सुविधा नहीं है। अहम बात यह है कि इस पूरे खेल को रोकने की बजाए मार्केट कमेटी के अधिकारी आंखें बंद करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं जिला प्रशासन चुनाव में व्यस्त है। इससे भी गंभीर बात ये है कि जिला प्रशासन भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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एक दिन बाद बिकी 1700 रुपये के हिसाब से
बांसा गांव निवासी विरेंद्र ने बताया कि वह मंगलवार सुबह पीआर धान लेकर अनाज मंडी में आया था। उस समय नमी की मात्रा ज्यादा बता दी थी, तो आज सुबह दोबारा बोली वाले आये बोले की यह तो 1700 रुपये लगेगी। इसमें नमी तो है साथ ही गर्म भी हो गई है।
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मजबूरी में देनी पड़ती है क्या करें
बांसा गांव के रहने वाले संदीप ने बताया कि उसकी धान दो दिन में 1720 रुपये के हिसाब से खरीदी है। उसे पता है जे फार्म सरकारी रेट का काटा जाएगा, लेकिन अब किसान क्या करे, दो दिन से वह मंडी में है। खेत में फसल भी कटवानी है। ऐसे में फसल कटवायें या मंडी में धान को सुखाएं।
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मशीन से नहीं मापी जाती नमी
अनाज मंडी में बिना मशीन के नमी का अनुमान लगाया जाता है। एजेंसी के कर्मचारी जब खरीद करने आते हैं तो वह हाथों में धान के दाने लेकर नमी का अनुमान लगाते हैं। किसानों को नमी ज्यादा बताकर डरा देते हैं और कम रेट में उसे खरीद लेते हैं।
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वॉटर कूलर से नहीं आता पानी, तरसते हैं किसान
अनाज मंडी में किसानों और मजदूरों को पानी के लिये भी तरसना पड़ रहा है। अनाज मंडी में लगे वॉटर कूलर बंद पड़े हैं उनमें पीने का पानी ही नहीं है। वहीं मार्केट कमेटी सचिव वॉटर कूलर चालू होने का दावा भी करते हैं।
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मुख्य प्रशासक के आदेशों दिखाया जा रहा है ठेंगा
अनाज मंडी में सोमवार को सीए डॉ. जे गणेशन ने निरीक्षण किया था और अनाज मंडी में सफाई करने व लाइट की उचित व्यवस्था कराने के निर्देश दिये थे, लेकिन अनाज मंडी में कोई सुधार नहीं हुआ। वैसे ही जगह जगह गंदगी के ढेर लगे हुए थे। इससे साफ है कि अनाज मंडी के अधिकारी को मुख्य प्रशासक के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
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खरीद धान शेड के नीचे, किसानों की खुले में
अनाज मंडी में शेड के नीचे खरीदी हुई धान की बोरियां लगी हुई है और किसानों की धान की ढेरी खुले आसमान के नीचे पड़ी है। ऐसे में बारिश आने पर किसानों की धान भीगने का खतरा बना रहता है। मंगलवार को हुई बारिश में भी धान मंडी में बाहर सड़क पर पड़ी हुई थी।
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नमी के नाम पर किसानों से कम रेट में पीआर धान की खरीद हो रही है। इस बारे में उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। यदि किसान शिकायत करते हैं तो उचित कार्रवाई की जाएगी। -हकीकत, मार्केट कमेटी सचिव।
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