- वसूली के लिए बकायेदारों के पास नहीं मिली कोई संपत्ति, साजिश के तहत लगाई चपत
राकेश चौहान
करनाल। जिले के विभिन्न विभागों के बकायेदारों ने फर्जीवाड़ा कर सरकार के 4.97 अरब रुपये हड़प लिए हैं। जबकि इन बकायेदारों के पास कोई संपत्ति नहीं है, जिनसे राजस्व विभाग यह रकम वसूल सके। इन बकायेदारों ने साजिश के तहत सरकार को चपत लगाई है। इनमें डीएफएससी विभाग के बकायेदारों के 3.61 करोड़ रुपये हैं। जबकि आबकारी सहित अन्य विभागों के 4.93 अरब रुपये हैं।
जिला राजस्व विभाग ने संबंधित विभागों को पत्र के माध्यम से इस बारे में अवगत करा दिया है। इस मोटी रकम की रिकवरी न होने में कहीं न कहीं संबंधित विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की भी लापरवाही नजर आ रही है। अक्सर देखा जाता है कि बकायेदार अपने रिश्तेदारों के नाम पर दूसरी फर्म बनाकर सरकारी टेंडर लेते हैं और एक ही संपत्ति को एक-दूसरे के नाम करा यह फर्जीवाड़ा करते हैं। - संवाद
बकायेदारों ने पहले ही ट्रांसफर कर दी संपत्ति
इन बकायेदारों ने पहले फर्म बनाकर उसमें अपनी संपत्ति दिखाई ताकि संबंधित विभाग से उन्हें टेंडर मिल सके। इसके बाद उन्होंने टेंडर का कार्य पूरा नहीं किया और फिर विभाग के बकायेदार हो गए। इस दौरान उन्होंने फर्म में दिखाई गई संपत्ति को बेच दिया या फिर किसी के नाम ट्रांसफर कर दिया। जब विभाग ने बकायेदार से रिकवरी करने के लिए राजस्व विभाग के पास मामला भेजा तो राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बकायेदार की संपत्ति को खंगाला। जिसमें उन्हें कुछ नहीं मिला। जिससे राजस्व विभाग रिकवरी कर सके। इस तरह योजना से इन बकायेदारों ने सरकार के 4.97 रुपये डकार लिए।
बैंक लोन की तरह संपत्ति को गिरवी रखना चाहिए
अधिवक्ता हरीश आर्य ने कहा कि सरकारी विभाग को अपनी टेंडर प्रक्रिया को मजबूत करना होगा। जब विभाग किसी फर्म को टेंडर देता है तो फर्म द्वारा दिखाई गई संपत्ति को बैंक लोन की तरह गिरवी रखना चाहिए ताकि फर्म का मालिक उसे न तो बेच सके और न ही अपने रिश्तेदारों के पास ट्रांसफर कर पाए। उस संपत्ति की जानकारी राजस्व विभाग को पहले ही दी जानी चाहिए। ताकि उस संपत्ति की रजिस्ट्री न हो सके और बकायेदार होने पर विभाग अपनी रिकवरी उस संपत्ति से कर सके।
अलग-अलग विभाग से बकायेदारों से रिकवरी के लिए केस आए थे। इनमें कुछ केसों में जब फर्म मालिक की संपत्ति खंगाली तो उसके नाम कोई संपत्ति नहीं मिली। ऐसे में 4.97 अरब रुपये वसूल नहीं हो पाए। इस बारे में संबंधित विभाग को अवगत करा दिया है। आगामी कार्रवाई अब संबंधित विभाग द्वारा की जाएगी।
मनीष यादव, डीआरओ, करनाल