यमुना से सटे गांवों में विवादित चकबंदी के मामले में पीड़ित किसानों को समर्थन देने के लिए संत गोपालदास शनिवार को गांव लालुपुरा पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन पीड़ित किसानों की समस्या का हल एक सप्ताह में नहीं करता तो पूरा संत समाज अनशनकारियों के साथ बैठ जाएगा।
चकबंदी से पीड़ित पांच गांवों के ग्रामीणाें ने शनिवार का दिन काले दशहरे के रूप में मनाया और भ्रष्ट अधिकारियों व भूमाफियाओं का पुतला जलाया। शनिवार को संत गोपालदास को घरौंडा से मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ लालुपूरा पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने वंदे मातरम के नारे लगाकर बैलगाड़ी में बैठाकर अनशन स्थल पर उन्हें ले गए।
संत गोपाल ने अनशन स्थल पर पीड़ित किसानों की समस्या सुनीं। किसानों ने बताया कि उनकी खरीदी जमीन को भूमाफियाओं ने अधिकारियों से चकबंदी के नाम पर हड़प लिया। ग्रामीणाें ने चकबंदी की निष्पक्ष जांच करवाने के लिए प्रशासन से अनेकों बार मांग की है। यहां तक देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से भी मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर चुके है।
गोपाल दास ने कहा कि चार गांवों की जमीन जाने का उन्हें बहुत ही गहरा दुख है। आज किसान रोटी के मोहताज हो गए है। प्रशासन ने जो चकबंदी की है उसकी जांच सीबीआई से की जानी चाहिए। इस आंदोलन का पूरा साथ देंगे।
उन्होंने प्रदेश सरकार व प्रशासन को चेताते हुए कहा कि अगर पीड़ित किसानाें को उनका हक नहीं मिला तो वे संत समाज के साथ अनशन स्थल पर बैठ जाएंगे और जब तक निष्पक्षता से जांच नहीं होगी तब तक अनशन स्थल पर बैठे रहेंगे। प्रदेश की गोचरांदों पर कब्जे हो रहे हैं। चीन, पाकिस्तान भारत की जमीन दबाता जा रहा है, वहां सरकार कुछ नहीं कर पा रही है।