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Karnal News: सोने की कीमत हो नियंत्रित, राइस एक्सपोर्ट के लिए योजना में बदलाव लाए सरकार

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। केंद्र सरकार के बजट से व्यापारियों और उद्यमियों को बड़ी आस है। इनकी उम्मीद में भी मध्यम वर्ग का हित और जरूरत छुपी है। सराफ कारोबारियों ने सरकार से सोने और चांदी की कीमत को नियंत्रित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मध्यम वर्ग के हाथ से बाहर होता जा रहा है। इसी तरह से राइस एक्सपोर्टर ने लोन पर लगने वाले ब्याज की योजना में संशोधन की मांग की है। साथ ही बासमती पर एचआरडीएफ और मार्केट फीस को भी पूरे देश में एक समान करना चाहिए। इसकी प्रत्येक राज्य में होने वाली अलग कीमत का असर भी मिलों के संचालन पर पड़ रहा है। वहीं कुछ व्यापारियों ने रोजमर्रा की जरूरतों पर जीएसटी कम करने की मांग की है।

वाहनों की कीमत भी होनी चाहिए कम
ऑटोमोबाइल शोरूम संचालक रविंद्र ढल ने कहा कि जीएसटी कम होने से दोपहिया वाहनों की बिक्री पहले से बढ़ी है। सरकार को कीमतों में भी कमी लानी चाहिए ताकि हर कोई दोपहिया वाहन ले सके। कच्चे माल की कीमत ज्यादा है, इसे कम करना चाहिए। पिछले पांच साल में वाहनों की कीमत दोगुना तक हो गई है। जीएसटी छूट के बाद केवल थोड़ा ही फर्क पड़ा है।
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दोगुनी हुई सोने की कीमत करें नियंत्रित
सराफा कारोबारी दिनेश गुलाटी का कहना है कि सरकार को सोने और चांदी की कीमत नियंत्रित करनी चाहिए, यह काफी बढ़ रही हैं। इनकी कीमतों के ठहराव के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे। एक साल में दोगुना से ज्यादा दाम हो गया है। बढ़ती कीमत के कारण सोना मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होता जा रहा है, जिसका असर व्यापार पर पड़ रहा है। सरकार को बजट में यह सौगात देनी चाहिए।

जीएसटी को और कम करने की जरूरत
हरियाणा व्यापार मंडल के प्रधान कृष्ण लाल तनेजा का कहना है कि बजट में जीएसटी को और कम करने की जरूरत है। व्यापारी और आमजन को इसका सीधा लाभ होता है। अभी कपड़ा और करियाना की कई जरूरी चीजों पर जीएसटी ज्यादा है, इनके दामों को कम करने के लिए सरकार विचार करे। इसके अलावा व्यापारी वर्ग के लिए छोटे ऋण भी दिए जाने चाहिए।



रोजमर्रा के उत्पादों के दामों में हो कमी
हरियाणा व्यापार मंडल के महासचिव हरमीत सिंह हैप्पी का कहना है कि जीएसटी कम होने से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को राहत मिली है। जिस उत्पाद में जीएसटी कम हुआ, उसका उत्पादन और मार्केट में भी तेजी आई है। सरकार को रोजमर्रा के उत्पादों पर भी ध्यान देते हुए जीएसटी में कमी लानी चाहिए, ताकि हर वर्ग को लाभ मिले। कपड़ा, जूते और खाद्य सामग्री के दामों को कम करने की जरूरत है।


बिजली बिलों में फिक्स चार्ज किए जाए कम
राइस एक्सपोर्टर सुशील जैन का कहना है कि बिजली बिलों में फिक्स चार्ज बढ़ाया गया है, उसे कम किया जाए। बासमती पर एचआरडीएफ और मार्केट फीस को कम करना चाहिए। यह सभी राज्यों में एक समान होनी चाहिए। एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए लोन पर ब्याज पहले कम था, फिर सरकार ने इसे बंद किया। इसकी लिमिट 50 लाख रुपये तक की गई है। इसे फ्लैट किया जाना चाहिए।
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मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर बने बजट
सरदार पटेल कपड़ा मार्केट एसोसिएशन के प्रधान योगेश बुगड़ा का कहना है कि बजट मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए। बढ़ती महंगाई में आय के स्रोत कम हो रहे हैं। इसे बढ़ाने के लिए सरकार कदम उठाए। आयकर और जीएसटी पर छूट की जरूरत है, जिन व्यापारियों ने जीएसटी के पुराने भुगतान नहीं किए, उन्हें भी छूट दी जानी चाहिए।
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