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खुद कष्ट सहकर भक्तों के दुख हरते हैं भगवान : आचार्य त्रिभुवन

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संवाद न्यूज एजेंसी
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मूनक। अलावला गांव के शाकुंभरी देवी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य त्रिभुवन ने कहा कि भगवान व भक्त के बीच में प्रेम का नाता विशेष होता है। जिसमें भगवान अपने भक्तों का विशेष ध्यान रखते हैं, वह खुद तो कष्ट सहन करते हैं, लेकिन भक्त पर आंच नहीं आने देते।
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उन्होंने कहा कि मीराबाई उनके परिवार द्वारा दिए गए अनेक कष्ट सहन कर भगवान की भक्ति में लीन रही। इस जीवन-मरण के बंधन से मुक्त होकर अमर हो गई। उन्होंने भगवान की अनेक प्रेम भरी गीत व कविताएं लिखीं, जिनमें भगवान व भक्त का प्रेम दर्शाया गया। आचार्य ने बताया कि भगवान की भक्ति से व्यक्ति में ज्ञान, वैराग्य, त्याग सभी आ जाता है। उसमें भगवान के सिवा कोई दिखाई नहीं देता। मीराबाई भगवान की भक्ति में इतनी लीन हो गई कि उसने जहर पी लिया, फिर भी उसे कुछ नहीं हुआ। कथा के दौरान सरपंच अजीत राणा, पंडित राधा कृष्ण, सत्यनारायण शर्मा, कुलदीप नंबरदार, काबुल सिंह राणा, नरपल राणा और विजेंद्र राणा के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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