धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में दशहरे का पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास से मनाया गया। कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी की ओर से थीम पार्क में आयोजित दशहरे के मेले में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया।
सुबह से ही थीम पार्क के आसपास चहल-पहल शुरू हो गई थी। थीम पार्क से लेकर गुरुद्वारा छठी पातशाही और सन्निहित सरोवर तक दुकानें लगाई गईं। दशहरे मेले को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। गौरतलब है कि इस बार शहर में मुख्य रूप से रावण दहन का आयोजन दो की बजाए एक ही संस्था द्वारा किया गया।
दशहरा मेले की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी के संरक्षक एवं स्थानीय विधायक अशोक अरोड़ा ने की। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध व्यवसायी इंद्र सिंगला व मुख्य अतिथि डॉ. अनुराग कौशल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। दशहरा कमेटी की ओर से विधायक अशोक अरोड़ा सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों को कमेटी के प्रधान केसर सुभाष गुलाटी ने पगड़ी बांधकर सम्मानित किया। थीम पार्क के ग्राउंड में हजारों लोगों की भीड़ ने राम और रावण के युद्ध का आनंद उठाया।
कार्यक्रम में रंगीन आतिशबाजी और पटाखों का भी लोगों ने खूब आनंद लिया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। अंत में राम ने रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया। तीनों पुतले धू धू करके जल उठे।
इस बार नहीं निकाली गई शोभायात्रा
हर साल दशहरा कमेटी की ओर से रेलवे रोड स्थित सनातन धर्म मंदिर से विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया जाता था। यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई थीम पार्क पहुंचती थी, लेकिन इस बार शोभायात्रा का आयोजन नहीं किया गया। दशहरा कमेटी के प्रचार सचिव फतेहचंद गांधी के अनुसार दशहरा उत्सव रविवार को होने के कारण शोभायात्रा नहीं निकाली गई, क्योंकि रविवार को बाजार बंद रहता है।
एक ही स्थान पर किया गया रावण दहन
पिछले कई वर्षों से कुरुक्षेत्र में दो स्थानों पर रावण दहन किया जाता था। जहां कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी थीम पार्क में दशहरा उत्सव मनाती है वहीं दूसरी ओर सर्वजातीय सनातन धर्म दशहरा कमेटी की ओर से पिछले वर्ष ब्रह्मसरोवर के पूर्वी तट पर दशहरा उत्सव का आयोजन किया गया था, लेकिन इस बार थीम पार्क में ही दशहरा मनाया गया।
बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है दशहरा : अरोड़ा
स्थानीय विधायक अशोक अरोड़ा ने दशहरा उत्सव पर थीम पार्क में उमड़ी हजारों लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि दशहरा उत्सव बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है आज हमें अपने अंदर के रावण को मारने की जरूरत है ताकि समाज में बुराई न पनपे। उन्होंने जनता को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के तीज त्योहार आपसी भाईचारे का प्रतीक है। हमें मिलजुल कर इन त्योहारों को मनाना चाहिए। अशोक अरोड़ा ने कन्या भ्रूण हत्या को समाज के माथे पर कलंक बताते हुए सामाजिक बुराइयां दूर करने की अपील की।