संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ‘धन धन गुरु रामदास जी, जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल’ के जय घोष से गुरुद्वारा डेरा कार सेवा गूंज उठा। रविवार सुबह गुरु नानक सेवा जत्था और गुरुद्वारा मंजी साहिब की ओर से गुरुद्वारा डेरा कार सेवा में धन धन गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर दीवान सजा कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया। सुबह दीवान में गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश कर अरदास की गई। श्रद्धालु सुबह से ही सजे दीवान में गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेकते रहे।
नगर कीर्तन में भाई कवलजीत सिंह ने कथा में बताया कि भाई जेठा का जन्म 24 सितंबर 1534 को लाहौर की चूना मंडी में माता दया कौर और पिता हरी दास के घर हुआ। भाई जेठा के पिता उबले हुए चने बेचकर घर का गुजारा चलाते थे। जब भाई जेठा दो साल के हुए तो माता का देहांत हो गया। सात साल के हुए तो पिता का साया सिर से उठ गया। तब जेठा की नानी उनको अपने साथ गोइंदवाल ले आई। जहां भाई जेठा गुरु अमरदास जी के साथ धार्मिक आयोजनों में जाने लगे। इनके भक्ति भाव से प्रसन्न होकर तीसरे गुरु अमरदास जी ने इन्हें एक सितंबर 1574 को गुरु की उपाधि दी तथा नया नाम गुरु रामदास रखा। वे इस पद पर एक सितंबर 1581 तक बने रहे, इसी दौरान गुरु रामदास ने रामसर शहर की नीव रखी जो अब अमृतसर है।
सिख धर्म में चौथे गुरु के कई बड़े योगदान और कार्य थे, इन्होंने चार फेरे लिखे और गुरुमत की मर्यादा का महत्व बताया, गुरु साहिब ने नई विवाह प्रणाली का प्रतिपादन किया तथा सामूहिक लंगर प्रथा को आगे बढ़ाया। इसी समय में स्वर्ण मंदिर की नींव रखी गई, अपने कार्यकाल में गुरु जी ने 30 रागों में 638 भजनों का लेखन भी किया, एक सितंबर, 1581 को इन्होने नश्वर शरीर का त्याग किया। कीर्तन दरबार में अमृतसर में दरबार साहिब के हजूरी रागी भाई अमनदीप सिंह, हरमिंदर साहिब के रागी जथे भाई जबरतोड़ सिंह, ज्ञानी मेजर सिंह ने गुरु की महिमा का गुणगान कर संगत को निहाल किया। कीर्तन दरबार के दौरान अटूट लंगर में श्रद्धालु लंगर चखते रहे। इस अवसर पर गुरु नानक सेवा जत्था की तरफ से भाई रतन सिंह तथा उनके सहयोगियों ने डेरा कार सेवा के प्रमुख बाबा सुक्खा सिंह को सिरोपा और शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। गुरु प्रबंधक कमेटी के सचिव इंद्रपाल सिंह, प्रीत पाल सिंह पन्नू, राजेंद्र अरोड़ा पप्पी, पारस अस्पताल के डाक्टरों की टीम, देवेंद्र कौर भिडर, सहित विभिन्न समाजसेवियों कों सम्मानित किया।