कागज के फूल, जूते-चप्पल, आचार, कपड़े और फर्नीचर सब कुछ है गीता जयंती कुरुक्षेत्र उत्सव के क्राफ्ट मेले में, मगर जो नहीं दिखा वह है पवित्र ग्रंथ गीता का स्टाल।
ये हालात वहां हैं, जिस आयोजन का एकसूत्रीय उद्देश्य गीता का प्रचार-प्रसार है। गीता के इस प्रचार-प्रसार के लिए लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों का सरकारी अनुदान खर्च हो रहा है। ऐसा भी नहीं है कि पवित्र ग्रंथ गीता की स्टाल लगाने लिए विक्रेताओं ने आवेदन न दिया हो।
आवेदन दिया, मगर अभी तक यह आवेदन स्वीकार नहीं किया, जबकि आवेदन करने वाले पिछले वर्षों में भी इसी क्राफ्ट मेले में स्टाल लगा चुके हैं। बहरहाल गीता की स्टाल के लिए आवेदन करने वाले थक हार कर बैठ चुके हैं।
अब इनका कहना है कि गीता जयंती कुरुक्षेत्र उत्सव में श्रीमद्भागवद गीता की नहीं, बल्कि 50 तरह के जूतों और तरह-तरह के लजीज व्यंजनों के साथ सजावटी सामान की जरूरत है। लिहाजा गीता का संदेश दुनियाभर में पहुंचाने वाली पुस्तक के लिए यहां स्थान मुहैया नहीं हो सका।
उल्लेखनीय है कि गीता जयंती कुरुक्षेत्र उत्सव में पिछले कई वर्षों से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हरियाणा की प्रदेश प्रदर्शनी और प्रतियोगिताओं सहित देशभर के स्टेट अवार्डी और नेशनल अवार्डी कलाकारों का शिल्पमेला ब्रह्मसरोवर तट की परिक्रमा में लगाया जा रहा है। सोमवार से शुरू हुए इस क्राफ्ट मेले में करीब 200 स्टालें अलाट की गई, मगर इनमे श्रीमद्भागवद गीता के लिए एक भी स्टाल अलाट नहीं किया गया।
चक्कर लगाकर थक चुके हैं : सोनी
रंजन सोनी के मुताबिक क्राफ्ट मेले में गीता भंडार लगाने के लिए वह कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के दफ्तर में कई चक्कर लगा चुके हैं। इधर से उधर भेजने के अलावा कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। यहां तक की सोमवार दोपहर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सीईओ साहेब से मिले थे, उन्होंने जुबानी तौर पर कहा, मगर लिखित में आदेश नहीं दिए।
सीईओ ने मिलने से मना कर दिया : मित्तल
गीता पुस्तक विक्रेता जयप्रकाश मित्तल के मुताबिक वे केडीबी के दफ्तर में कई चक्कर लगा चुके हैं। सीईओ से भी मिले थे,उन्होंने एनजेडसीसी के अधिकारियों के पास भेजा था। यहां एनजेडसीसी के अधिकारियों ने आवेदन पर केडीबी के सीईओ के हस्ताक्षरों के बाद ही स्टाल अलाट करने को कहा था। जब हस्ताक्षर कराने सीईओ से मिलने गए तो उन्होंने ये कह कर मिलने से इंकार कर दिया कि वे इस समय स्टाल के सिलसिले में किसी से बात नहीं करेंगे।