- बाल कल्याण भवन के डे-केयर केंद्र में दिया जा रहा प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। केवीए डीएवी महाविद्यालय में शुरू हुए चाइल्ड केयर व बुजुर्गों की देखभाल का डिप्लोमा कोर्स युवतियों के लिए कॅरिअर का नया विकल्प बन रहा है। एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में छात्राएं बच्चों की देखभाल, पोषण, व्यवहार प्रबंधन और प्रारंभिक शिक्षा की बुनियादी जानकारी हासिल कर रही हैं। कोर्स का सबसे प्रभावी हिस्सा इसका व्यावहारिक प्रशिक्षण है।
इस कोर्स का एक वर्ष पूरा होने के बाद छात्राओं को जिला बाल कल्याण भवन स्थित डे-केयर केंद्रों में 120 घंटे का फील्ड प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें उन्हें बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी दी जाती है। इस समय महाविद्यालय की करीब सात छात्राएं प्रशिक्षण ले रही हैं।
केवीए डीएवी महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मीनू शर्मा ने बताया कि इस कोर्स का उद्देश्य छात्राओं को एक ऐसा कौशल देना है जिससे वे आत्मनिर्भर बनें। कोर्स के दौरान छात्राएं बच्चों की देखभाल की बारीकियों को व्यावहारिक रूप से सीख रही हैं। बच्चों के खानपान, सफाई और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना, उन्हें सही समय पर खिलाना, सुलाना और उनके व्यवहार को समझकर उन्हें शांत करना सीख रही हैं।
इसके साथ ही छात्राएं सिखाने वाली गतिविधियां जैसे कहानी सुनाना, पजल्स हल कराना, रंग भरवाना और सामूहिक खेल के जरिये बच्चों की मानसिक और सामाजिक वृद्धि में भी भागीदारी निभा रही हैं। उन्हें अभिभावकों से संवाद करने, बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता बरतने का भी व्यावहारिक अनुभव दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण उन्हें न केवल आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि चाइल्ड केयर के क्षेत्र में एक व्यावसायिक पहचान भी दिला रही है।
कोर्स करने से यहां मिलेंगे नौकरियों के विकल्प
- प्राइवेट व सरकारी डे-केयर केंद्र
- बुजुर्गों के देखभाल केंद्र
- प्री-स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र
- नर्सिंग इंडस्ट्रियों में
- विदेश में नौकरियां
विदेश में नौकरी करने का सपना
छात्रा हरमीत का कहना है कि यह कोर्स हमें नौकरी के लिए तैयार कर रहा है, खासकर प्री-स्कूल या प्ले स्कूल जैसी जगहों पर। कोर्स में प्रशिक्षण लेते हुए हमें छोटे बच्चों को समझने का अवसर मिलता है। वह विदेश में नौकरी करना चाहती है, क्योंकि वहां इस कोर्स के लिए काफी मांग है जिससे वहां नौकरी मिलने में आसानी होगी।
पहले जाना पड़ता था दूसरे राज्य में
छात्रा विशाखा का कहना है कि पहले इस कोर्स के लिए अपने राज्य से बाहर जाना एकमात्र विकल्प था, लेकिन हमारे जिले में ही यह कोर्स उपलब्ध होने से हमें कॅरिअर के और अवसर मिल रहे हैं जिससे हम अपने देश में ही नहीं बल्कि विदेश में नौकरी कर सकते हैं।
ये कोर्स प्रदेश में राष्ट्रीय कौशल विकास कॉर्पोरेशन और घरेलू कामगार क्षेत्र कौशल परिषद नई दिल्ली से संबद्ध हैं। वहीं इसके साथ एक अन्य कोर्स एल्डर्ली केयर भी है जिसमें बुजुर्गों की देखभाल करने के तौर तरीके सिखाए जाते हैं। कोर्स छात्राओं को एक आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से उपयोगी कॅरिअर की दिशा में प्रेरित करने का काम करेगा।
- प्राचार्या डॉ. मीनू शर्मा, केवीए डीएवी महिला महाविद्यालय