संवाद न्यूज एजेंसी
मूनक। पबाना हसनपुर गांव के बाबा साहब अंबेडकर भवन में सोमवार को प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। मास्टर ट्रेनर और कृषि किसान कल्याण विभाग से विशेषज्ञ के पद के सेवानिवृत्ति डॉ. राजेंद्र सिंह ने प्राकृतिक खेती पर किसानों को जागरूक किया। साथ ही बताया कि देसी गाय खरीदने के लिए 30000 रुपये अनुदान दिया जा रहा है
उन्होंने बताया कि किसान लंबे समय से खेती में फसलों में पोषक तत्वों के लिए गोबर की खाद और मूंग, उड़द ढांचा इत्यादि का प्रयोग करते आ रहे हैं। खेती में जब से रासायनिक खाद व कीटनाशक का प्रयोग आवश्यकता से कहीं अधिक बढ़ाना शुरू हुआ, तब से भूमि तथा खान-पान में कई नई समस्याओं ने जन्म लिया है।
किसानों ने अपने संसाधनों का प्रयोग करना कम कर दिया है और बाहरी संसाधनों पर निर्भरता अधिक बढ़ जाने की वजह से खेती की लागत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। हमारी जमीनों में उर्वरा शक्ति में गिरावट आई है । प्राकृतिक खेती भूमि की उर्वरा शक्ति में सुधार सस्ती व टिकाऊ भी है।
एक देसी गाय के गोबर से 30 एकड़ की खेती आसानी से की जा सकती है। पबाना हसनपुर गांव में चौधरी विजेंद्र सिंह कई सालों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। रीना व मौसम जीवामृत का प्रयोग करके प्राकृतिक विधि से न्यूट्रिटिव किचन गार्डनिंग कर रही हैं।
सुरेंद्र कुमार बसताडा वरिष्ठ सदस्य जिला टीम हरियाणा विज्ञान मंच ने महिलाओं को प्राकृतिक विधि से न्यूट्रिटिव किचन गार्डनिंग व मसाले की खेती के बारे में बताया कि कृषि किसान कल्याण विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती शुरू करने के लिए देसी गाय खरीदने के लिए 30000 रुपये अनुदान दिया जा रहा है।
मधुमक्खी पालक संजय कुमार ने बताया कि प्राकृतिक खेती का आसपास जीव जंतुओं से सीधा संबंध है। जिस क्षेत्र में कीटनाशक दवाइयां का अंधाधुंध प्रयोग किया जाता है, वहां मधुमक्खियां की संख्या कम होने से फसलों की पैदावार में गिरावट आती है। मधुमक्खी के बक्से सरसों की फसल में रखने से दो क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार में बढ़ोतरी देखी गई है।क