सामूहिक दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग मामले में जेएमआईसी अक्षय चौधरी की अदालत से आरोपी महिला और उसके पति को जमानत दे दी गई । उधर, पुलिस की तरफ से लगाई गई महिला के वायस सैंपल और हैंड राइटिंग देने की परमिशन भी अदालत ने दे दी है। इसी के बाद अदालत में ही महिला ने अपने हस्ताक्षर के नमूने दे दिये हैं, जबकि वायस सैंपल के लिए भी रजामंदी जता दी है।
बुधवार दोपहर पुलिस दंपती को लेकर अदालत में पहुंची। यहां पर महिला पक्ष की तरफ से सीनियर एडवोकेट भूपेंद्र सिंह राठौड़ ने जमानत की अपील की। जिसका सरकारी वकील ने विरोध किया, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने शाम 4 बजे दंपती की जमानत मंजूर कर दी। इसके लिए दोनों को 50-50 हजार रुपये के बांड भरने होंगे। इसी दौरान पुलिस ने महिला की रिकार्डिंग को लेकर वायस सैंपल और हैंड राइटिंग लेने की अपील की थी। इसके लिए भी परमिशन दे दी गई । इस फैसले के बाद दंपती की ओर से मुचलके लिए 50-50 हजार रुपये के बांड भरे गए।
दो बार बयान होने पर भी आरोपी गिरफ्तार क्यों नहीं : राठौड़
महिला पक्ष के वकील भूपेंद्र सिंह राठौड़ और राहुल बाली ने कहा कि अदालत के सामने रखे सबूतों के आधार पर जमानत मिली है। अब हमारा प्रयास रहेगा कि 376 के मामले में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हो। जबकि इस मामले को पुलिस एसआईटी की जांच के नाम पर दबाए हुए हैं। जबकि महिला दो बार अदालत में 164 के बयान दे चुकी है। आरोपियों को गिरफ्तार नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हाईकोर्ट जाएंगे।
ये है मामला
6 जुलाई को महिला ने अजय भाटिया, प्रिंसिपल पूनम नेवट और तहसीलदार राजबख्श के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया। आरोप है कि इसी मामले में अजय भाटिया को महिला रकम वसूलने के लिए ब्लैकमेल करने लगी। पहले 6 लाख रुपये दे दिए, बावजूद इसके महिला और पैसे की डिमांड कर रही थी। जिसकी सिविल लाइन थाने में शिकायत दी। 21 अगस्त को महिला और उसके पति को सवा सात लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया। अगले दिन 22 अगस्त को पुलिस ने दंपती का दो दिन का रिमांड मांगा, लेकिन अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। रिवीजन करने पर 31 अगस्त को एक दिन का रिमांड मिला लेकिन पुलिस उनसे रिकवरी नहीं कर पाई।