करनाल। आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले सिविल सर्जन कार्यालय के परिसर में आशा कर्मियों का 32वें दिन भी प्रदर्शन जारी रहा। जिलेभर की आशा कर्मचारी शुक्रवार को धरनास्थल पर पहुंचीं और मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। साथ ही वार्ता के लिए सरकार से निमंत्रण न मिलने पर रोष जताया।
यूनियन जिला प्रधान कविता, जिला सचिव सुदेश ने कहा कि प्रदेश सरकार को आशा वर्करों से हड़ताल के 32 दिन बीत जाने के बाद भी बात तक करने को तैयार नहीं है। इसका नतीजा 2024 के चुनाव में सरकार को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आशा कर्मियोंे ने मानदेय में बढ़ोतरी की जाए और 26 हजार न्यूनतम वेतन, आशा कर्मी को पक्का कर्मचारी बनाने, उनके मानदेय और प्रोत्साहन राशियों को महंगाई भत्ते के साथ जोड़ने, उन्हें ईएसआई व पीएफ और सेवानिवृत सुविधा समेत सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ दिया जाए।
इसके अलावा अनुभव और योग्यता के आधार पर आशा कर्मचारी की पदोन्नति करने सब सेंटर पर बैठने और सामान रखने की जगह सुनिश्चित करवाने, जिन गांवों में सब सेंटर नहीं है वहां सेंटर खोले जाएं। मुख्यमंत्री की ओर से घोषित सात हजार भी तुरंत जारी किए जाएं।
आशा कर्मचारी को पीएचसी में मीटिंग में जाने और मरीज के साथ जाने के लिए किराया भत्ता दिया जाए। रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष की जाए। आशा कर्मी को ड्रेस के लिए दो हजार रुपये वार्षिक दिए जाएं। इस मौके पर ओपी माटा, सतपाल सैनी, धीरज सिंह रावत, कामरेड जगमाल सिंह, शिशपाल, रूपा राणा, मंजू बवेजा, कांता, जगदीश, नीरू, सुरेशो, शोभा, गीता, लाभ सिंह आर्य आदि मौजूद रहे।