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स्वतंत्रता सेनानी खुशी राम की बिगड़ी तबीयत

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देश की आजादी के लिए जिसने कठोर यातनाएं सही, उस स्वतंत्रता सेनानी को आजादी के दशकों बाद भी उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में बेड नसीब नहीं हो पा रहा है। मजबूरन स्ट्रेचर पर उसका उपचार कराया जा रहा है। बात हो रही है करनाल के वसंत विहार की गली नंबर आठ में रहने वाले 102 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी खुशी राम की। मंगलवार को तबीयत खराब होने के कारण उन्हें कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया। हालत खराब होने पर मेडिकल कॉलेज से बुधवार दोपहर उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। पीजीआई में शाम छह बजे तक वह स्ट्रेचर पर थे। स्ट्रेचर भी इतना तंग कि करवट नहीं ली जा सकती।
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सालवन गांव में खुशी राम का जन्म 10 फरवरी 1918 को हुआ। उनमें राष्ट्रभक्ति कूट कूटकर भरी हुई थी और होश संभालते ही वह आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। कई बार जेलों में कठोर यातनाएं सही। 18 साल की उम्र में वह हैदराबाद की जेल में रहे थे। 1942 में क्रांति की गतिविधियों के चलते उन्हें मुलतान जेल में डालकर पीटा गया। करनाल जिले में 55 से अधिक स्वतंत्रता सेनानी थे जिनमें से एकमात्र खुशी राम ही जिंदा हैं। आजादी के बाद उन्हें सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी का प्रमाण पत्र व ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। उन्हें स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन भी मिलती है। 16 साल पहले उन्हें पैरालाइज हो गया। उसके बाद से उनके बेटे उनकी सेवा कर रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के अध्यक्ष अधिवक्ता नरेंद्र सुखन ने मेडिकल कॉलेज और पीजीआई चंडीगढ़ के रवैये की निंदा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सभी के दिलों में सम्मान की भावना होनी चहिये। वह इस मामले को सरकार और प्रशासन के संज्ञान में लाएंगे। उन्होंने खुशी राम के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
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