करनाल। जिले की अलग-अलग अनाज मंडियों में करीब 20 करोड़ रुपये के धान के फर्जीवाड़े को निगरानी करने वाले अधिकारियों ने मनमाने और सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया। इसके लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर चार एकड़ के छोटे किसान का भी 20 से 25 एकड़ जमीन दिखाकर पंजीकरण किया गया। इसके अलावा जिले से बाहर के किसानों का भी पोर्टल पर पंजीकरण कराकर उनके नाम से फर्जी गेटपास काटे गए।
तीन मंडी सचिव और डीएफएससी की गिरफ्तारी के बाद इस फर्जीवाड़े से परतें उठने लगी हैं। आढ़ती, मिलर के साथ मिलीभगत करके मंडियों के अधिकारी मनमर्जी से पोर्टल पर जमीन दिखाकर फर्जीवाड़े का ग्राउंड तैयार करते थे। जिस पर कागजों में ही फसल उगाने से लेकर मंडी में आवक, खरीद और मिल तक पहुंचने का काम होता था। पकड़ में न आएं, इसके लिए मिलर भी यूपी, बिहार और दिल्ली से सस्ता धान मंगवाकर स्टॉक को पूरा कर लेते थे।
फर्जीवाड़े में जिले के अलग-अलग थानों में छह प्राथमिकी दर्ज हैं, जिनकी जांच के लिए एसपी ने दो एसआईटी गठित की गई हैं। एएसपी कांची सिंघल और डीएसपी राजीव कुमार के नेतृत्व में अब तक मामले में जांच की जा रही है। मंगलवार को एसआईटी ने असंध मंडी के सचिव कृष्ण धनखड़, जुंडला मंडी के सचिव दीपक कुमार, करनाल मंडी की सचिव आशा रानी को गिरफ्तार किया और जेल में बंद पूर्व डीएफएससी अनिल को प्रोडक्शन वारंट पर लिया। पांच दिन के रिमांड के दौरान इनसे कई इनपुट पुलिस को मिले हैं। सीजन के दौरान किसानों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ये अधिकारी औचक निरीक्षण भी करते रहे।
इससे पहले 6 फरवरी को हैफेड असंध के प्रबंधक प्रमोद कुमार, निसिंग प्रबंधक दर्शन सिंह, तरावड़ी मंडी से डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र, इंद्री के डीएफएससी निरीक्षक रणधीर और वेयरहाउस के सहायक तकनीशियन प्रदीप कुमार को काबू किया था, उनसे मिले इनपुट पर बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। मामले में अब तक 26 गिरफ्तारी हो चुकी हैं।
पोर्टल पर वे भी किसान… जिनके पास जमीन ही नहीं
डीएसपी राजीव कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार ने किसानों को एमएसपी सहित अन्य लाभ देने के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल बनाया है। यहां प्रत्येक किसान का पंजीकरण होता है लेकिन आढ़ती और मिलर ने मिलीभगत करके उन लोगों का भी पंजीकरण कर दिया, जिनके पास कृषि योग्य भूमि है या नहीं। दोनों ही तरह के किसानों के नाम से फर्जीवाड़ा किया है। किसी किसान की पांच एकड़ जमीन है तो उसे 25 एकड़ दिखाया है। जिसके पास जमीन नहीं है यानी वह कुछ अन्य काम करता है तो उसके नाम से व प्रदेश व जिले से बाहर के किसानों के नाम पर भी पंजीकरण किया गया। इसी के तहत ही बिना वास्तविक आवक के अनाज मंडियों में गेट पास काटे गए और इसके बाद फर्जी खरीद भी दिखाई गई। जिसमें खरीद एजेंसियां भी शामिल हैं।
एजेंट, आढ़ती और मिलर बने मुख्य आधार.. पीवी में गुमराह करने के लिए मंगवाए ट्रक
न तो जीरी आई न खरीद हुई, इसके बाद मिल में इनवर्ड भी दिखाई गई। यह सारा काम कागजों में ही हुआ है। खरीद के इस अंतर को पूरा करने के लिए मिलरों ने आसपास के जिलों व राज्यों दिल्ली व यूपी से सस्ता धान मंगवाकर कम रेट पर खरीदकर अपना स्टॉक पूरा किया, ताकि पीवी की पकड़ में न आएं लेकिन जांच में स्टॉक कम पाया गया, इसके बाद शिकायतें हुईं और जांच के दौरान पुलिस ने घोटाले को उजागर किया है। फर्जीवाड़े में मुख्य आधार आधार कमीशन एजेंट, आढ़ती और राइस मिलर बनें। क्योंकि इनके बिना अधिकारी कुछ भी नहीं कर सकते थे।