फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: सावन माह का महिलाओं को रहता था उत्साह

विज्ञापन
निरुपमा भट्टी
विज्ञापन
सावन माह भारतीय संस्कृति में सिर्फ बारिश का महीना नहीं बल्कि उत्सव, आस्था और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। सावन माह में प्राचीन समय में बाग में झूले डले हुए दिखाई देते थे। महिलाएं सावन माह का बड़ी उत्सुकता से इंतजार करती थीं।
विज्ञापन

अपनी सखी-सहेलियों के साथ पार्क में जा कर झूला झूलती थीं तथा उसके साथ सावन के गीत गाते हुए एक दूसरे के हाथों में मेहंदी लगाती थीं। पहले समय में अधिकतर मिठाई व अन्य सामान घर में ही तैयार किए जाते थे। लेकिन अब समय बदल गया है न तो लोगों के पास अब इतना समय होता है। उसके साथ ही आधुनिकता के युग में झूले झूलने की परंपरा भी लुप्त होती जा रही है। 55 वर्षीय निरुपमा भट्टी ने बताया कि सावन माह आस्था का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं भगवान शिव की आराधना से लेकर हरियाली तीज और रक्षाबंधन तक हर दिन किसी न किसी उल्लास से भरा रहता है लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सावन के इन पारंपरिक उत्सवों का स्वरूप बदलता जा रहा है। यह बदलाव एक और आधुनिकता के प्रभाव को दर्शाता है। आज की युवा पीढ़ी को अपने प्राचीन तीज-त्योहार व उत्सव को बचा कर रखना चाहिए। अब सावन में कम ही झूले देखने को मिलते हैं। हरियाली तीज को लेकर महिलाओं में उत्साह कम होता जा रहा है।
विज्ञापन

प्रस्तुति : निरुपमा भट्टी, सेक्टर पांच कुरुक्षेत्र
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें