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कोरोना से चार, ब्लैक फंगस से एक मरीज की मौत

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जिले में कोरोना के साथ-साथ ब्लैक फंगस भी जानलेवा होता जा रहा है। मंगलवार को ब्लैक फंगस से जिले में एक मरीज की मौत हो गई। जबकि चार नए केस सामने आए। जबकि कोरोना ग्रस्त चार मरीजों ने भी दम तोड़ दिया। इसके अलावा वायरस संक्रमण के 197 केस सामने आए व 367 मरीज स्वस्थ्य भी हुए। स्वास्थ्य महकमा ब्लैक फंगस व कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को लेकर चिंतित है। उधर, 8 दिनों में ब्लैक फंगस के 29 मामले सामने आ चुके हैं और पांच लोगों की जान भी चली गई है। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में 22 मरीजों को इलाज चल रहा है। ब्लैक फंगस के कारण मंगलवार को करनाल निवासी 40 वर्षीय व्यक्ति की जान गई है। इस व्यक्ति की मौत फंगस की पॉजिटिव रिपोर्ट आने से पहले ही हो गई थी।
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उधर, जिले में कोरोना पॉजिटिव मामले अपेक्षाकृत कम हुए हैं। मंगलवार को 197 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए हैं और 367 मरीज ठीक होकर घर गए है। कोरोना से अभी तक जिले में 478 लोगों की जान गई है। वहीं, जिला का पॉजिटिविटी रेट 8.49 प्रतिशत और रिकवरी रेट 92.90 प्रतिशत तथा मृत्यु दर 1.24 प्रतिशत है। अभी तक जिले में 355026 लोगों के सैंपल लिए हैं, इनमें 316673 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है और जिले में अब तक 38498 पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। इनमें से 35766 मरीज ठीक हो गए हैं। अभी तक कोरोना संक्रमण के2254 एक्टिव केस है।
हलवाना गांव में बढ़ते जा रहे हैं कोरोना के केस
मंगलवार को 2277 सैंपलों की रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार हलवाना गांव में कोरोना पॉजिटिव के 21 मामले सामने आए हैं। पिछले तीन दिनों में हलवाना गांव में पॉजिटिव केस बढ़ते जा रहे हैं। इससे अलग कोरोना पॉजिटिव केसों में डॉक्टर, वकील, पुलिस कर्मचारी, विद्यार्थी सहित अन्य व्यक्ति शामिल है। इससे अलग गांव में कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
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आज एक्मो मशीन, दस हजार लीटर के ऑक्सीजन टैंक का उद्घाटन करेंगे सीएम
करनाल। सीएम मनोहर लाल आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में आई एक्मो मशीन व दस हजार लीटर के ऑक्सीजन टैंक का उद्घाटन करेंगे। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. जगदीश चंद्र दुरेजा नेे बताया कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में एक्मो (एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) मशीन उपलब्ध कराई गई है। इस मशीन के स्थापित होने से आईसीयू व वेंटिलेटर के बाद इस मशीन के सहारे अति गंभीर मरीजों को कृत्रिम फेफड़े से सांस देकर लोगों को नया जीवन दिया जा सकेगा। केसीजीएमसी के निदेशक डा. जगदीश दुरेजा ने बताया कि आईसीयू व वेंटिलेटर के बाद मरीज को अब एक्मो पर लेकर मरीज की जान को बचाया जा सकता है। यह मशीन मरीज के लिए दिल और फेफड़ों को ताजगी देने के लिए आखिरी उपचार है। यह मशीन मुख्यमंत्री कोष से 50 लाख रुपये की ली गई है। सीएम मनोहर लाल का मेडिकल कॉलेज की ओर पूरा ध्यान है। वहीं मेडिकल कॉलेज में दस हजार लीटर का ऑक्सीजन टैंक लगाया गया है। इससे पहले भी मेडिकल कॉलेज में दस लीटर का ऑक्सीजन टैंक है। ऑक्सीजन की बढ़ती डिमांड के चलते यह दूसरा टैंक लगाया गया है।
ब्लैक फंगस के इलाज के लिए दस बेड बढ़ाने की तैयारी
- अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था बेड की कमी का मामला
राकेश चौहान
करनाल। बेड की कमी और ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए मरीज परेशान हो रहे हैं। हालांकि मेडिकल कॉलेज में 20 बेड का केयर सेंटर बना हुआ है। मगर बढ़ते मामलों के मद्देनजर यह नाकाफी है। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दस और बेड स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के निदेशक ने उच्च अधिकारियों को पत्र भेज दिया गया है। जल्द ही ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए अब कुल 30 बेड का केयर सेंटर बन जाएगा। ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए केयर सेंटर मेडिकल कॉलेज के अस्पताल ब्लॉक की चौथी मंजिल पर बनाया गया है। बता दें मेडिकल कॉलेज में करनाल सहित कैथल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर के मरीज भी दाखिल हो सकते हैं।
इंजेक्शन की कमी, मरीजों को नहीं लग रही समय पर डोज
मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के 22 मरीजों को इलाज चल रहा है। लेकिन उन्हें समय पर इंजेक्शन की डोज नहीं लग रही है। ब्लैक फंगस के मरीज को वजन के हिसाब से एफोटेरिसिन बी का इंजेक्शन लगता है। डॉक्टरों के अनुसार औसतन मरीज दिन में तीन डोज लगती है लेकिन मेडिकल कॉलेज में इन इंजेक्शन की कमी है। इसलिए सरकार ने जो व्यवस्था बनाई हुई है, उस के तहत मरीजों को समय पर इंजेक्शन नहीं लग पा रहा, क्योंकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा प्रदेश स्तर की कमेटी को ब्लैक फंगस के मरीज की जानकारी दी जाती है और फिर उसके बाद रोहतक पीजीआई से उस मरीज के लिए इंजेक्शन आते हैं। ऐसे में मरीज को देरी से इंजेक्शन लग रहा है।
एक मरीज के परिजन ने बताया कि उसका बेटा रोडवेज में ड्राइवर है। उसे ब्लैक फंगस है। दो दिन पहले ही उसे टीका लगना चाहिए था। अभी तक टीका नहीं लगा है। वहीं दूसरी ओर राहड़ा गांव के विनोद ने बताया कि उसके पिता बिशम्भर को ब्लैक फंगस की शिकायत है उसकी अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है दो बार उसके पिता के सैंपल लिए गए हैं और उसके पिता को मुंह भी सूज गया है।
ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ रहे हैं। पहले ही सरकार के निर्देश पर 20 बेड का वार्ड बनाया हुआ है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दस बेड और बढ़ाने के लिए उच्च अधिकारियों से अनुमति के लिए पत्र भेजा हुआ है। जल्द ही ब्लैक फंगस के वार्ड में 30 बेेड हो जाएंगे। ब्लैक फंगस के इंजेक्शन को लेकर भी उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा हुआ है। जल्द ही इंजेक्शन भी आ जाएंगे।
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- डॉ. जगदीश चंद्र दुरेजा, निदेशक, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल।
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