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लवणीय सुधार पर मंथन करेंगे भारत समेत चार देशों के वैज्ञानिक

Wed, 27 Nov 2013 09:45 PM IST
करनाल
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करनाल में केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में लवणीय सुधार तंत्र के लिए सर्वोत्तम प्रणालियों पर मंथन के लिए बुधवार से सार्क देशों के वैज्ञानिकों की तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई।
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यह कार्यशाला में सार्क कृषि केंद्र ढाका एवं केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल के संयुक्त तत्वाधान में हो रही है। कार्यशाला का उद्घाटन कासा के निदेशक डॉ. इंद्रपाल अबरोल ने किया। कार्यशाला मेें बंगलादेश से डॉ. जलालुद्दीन मोहम्मद शोएब, पाकिस्तान से डॉ. अरशद अली, श्रीलंका से डॉ. निहाल श्रीसेना दीनरत्ने एवं भारत से डॉ. सुरेश कुमार चौधरी विषय वस्तु विशेषज्ञ के तौर पर भाग ले रहे हैं।

यह सभी लवण प्रभावित मृदाओं के सुधार एवं प्रबंधन संबंधी अपने अनुभव साझा करेंगे। सार्क कृषि केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. तयान राज गुरंग कार्यशाला के संयोजक है एवं केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान की ओर से डॉ. एसके चैधरी भारत की ओर से संयोजक हैं।
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इस सभा का उद्देश्य सार्क क्षेत्र के लिए एक वैचारिक शोध पत्र प्रस्तुत करना है, जो सार्क क्षेत्र में लवण प्रभावित मृदाओं एवं उनकी पद्धतियों पर उपलब्ध आंकड़ों के प्रलेखन एवं संकलन पर आधारित होगा। डॉ. एसके चौधरी ने बताया कि लवणीय मृदा सुधार की सर्वाधिक प्रचलित एवं उचित तकनीक के तुलनात्मक परीक्षण द्वारा सार्क क्षेत्र में इस समस्या के समाधान के लिए सर्वोत्तम तकनीकी चिह्नित की जाएगी।

चिह्नित की गई सुसंगत एवं उपयुक्त तकनीकी के वृहत स्तर पर प्रयोग की संभावनाओं को चिह्नित करने का प्रयास किया जाएगा। कार्यशाला में सार्क कृषि केंद्र, सार्क क्षेत्र में लवणीय मृदा सुधार तंत्र के लिए सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों एवं पद्धतियों विषय पर एक वैचारिक शोधपत्र तैयार करेगा। सार्क क्षेत्र में अनुसंधान कर्ताओं प्रयास संस्थाओं/नियोजनकर्ताओं के मध्य इसके प्रसार का प्रयास करेगा।

इससे पहले उद्घाटन सत्र मेें डॉ. आईपी अबरोल ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि रोजाना बदलते वातावरण में मृदा लवणता प्रबंधन पर गहन विचार करना आवश्यक है। लवणता की समस्या के सुधार के लिए किसानों की भागीदारी, नियोजनकों के निर्णय एवं जल की मात्रा और उसका समुचित उपयोग पर ध्यान देने की जरूरत है। फसल उत्पादकता बढ़ाना बहुत आवश्यक है, परंतु हमें एक या दो फसलों की वजह अन्य फसलों के उत्पादन पर भी विचार करना चाहिए।

जल रिचार्ज एवं निम्न गुणवत्ता वाले पानी का खेती में प्रयोग की समस्या पर भी विचार करना होगा। हमें गहन विचार करना होगा कि प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग से लवणता प्रबंधन कैसे किया जा सकता है। डॉ. तयान राज गुरंग ने बताया कि सार्क  देशों में 14.32 मिलीयन हेक्टेयर भूमि लवण ग्रस्त है और सार्क कृषि केंद्र इसके सुधार के लिए कार्य कर रहा है।

इन देशों की कृषि, मृदा लवणता एवं फसल प्रबंधन को सुधारने के लिए अत्यंत प्रयत्न किए जा रहे हैं। हमारे समक्ष प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग, बाइटिक एवं एबाइटिक कारक, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, प्रौद्योगिकी एवं बदलते वातावरण की समस्या के लिए कार्य करना हमारा लक्ष्य है।

मौके पर संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि भारत व पाकिस्तान लवणग्रस्त भूमि एवं निम्न गुणवत्ता वाले पानी की समस्या और इसके सुधार के लिए रासायनिक सुधारक, भूस्थलीय जलनिकास एवं लवण सहनशील फसल प्रजातियों को विकसित करने से इस समस्या का समाधान हो सकता है। उन्होंने पानी की सही उपयोग पर भी ध्यान आकर्षित किया।
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एक किलो चावल पैदा करने के लिए 3000 लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए हमें इसके उपयोग पर गहन विचार करना होगा।
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