121....यमुना का पानी उतरने के बाद जमीन पर बिछी फसल। स्वयं
इंद्री। यमुना से सटे गांवों में पानी उतरने के बाद खेतों में पहुंचे किसान अपनी फसल की हालत देखकर बेहाल हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस क्षेत्र में बाढ़ तो पहले भी आती रही है लेकिन जमीन का इतना कटाव पहली बार हुआ है। यमुना की जो धारा उनके खेतों से पांच-छह एकड़ दूर बहती थी, वह अब खेतों के बिल्कुल साथ बह रही है। खेतों में बर्बादी देखकर किसान खून के आंसू रो रहा है।
गांव डबकोली खुर्द में तो यमुना का पानी खेतों के बीच में से होकर गुजर रहा है। फसल जमीन पर बिछी हुई है। कई फीट रेत खेतों में इकट्ठा हो गया है। ऐसे में किसानों को फसल की कटाई और बुआई के समय काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। बाढ़ में अपना सोलर पैनल गंवा चुके किसान रामपाल ने बताया कि उनकी बहत्तर एकड़ जमीन यमुना क्षेत्र में है। बिजली की सुचारू व्यवस्था न होने के कारण डेढ़ लाख रुपये खर्च करके सोलर पैनल लगवाया था। बाढ़ के दौरान पड़ोसी किसानों ने पैनल की कुछ एक प्लेट उतार ली थी, बाकी सब पानी में बह गई। जमीन भी यमुना पार चली गई। वो यमुनानगर की ओर से आकर खेतों तक पहुंचे हैं।
गांव जपती छपरा के सरपंच सबील ने बताया कि बाढ़ से निचले क्षेत्र म़े खेती करने वाले किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। यमुना का पानी गांव के जोहड़ में भर गया। जिससे जोहड़ ओवरफ्लो हो गया । पानी से लोगों के घरों को नुकसान पहुंचा है। गांव में कोई भी सर्वे टीम नहीं पहुंची है। क्षतिपूर्ति पोर्टल खुल गया है। पोर्टल पर अपलोड होने के बाद ही वास्तविक नुकसान का पता चल पाएगा।
121....यमुना का पानी उतरने के बाद जमीन पर बिछी फसल। स्वयं